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मध्यप्रदेश की डायरी: भोपाल ब्यूरो चीफ प्रणव पारे की कलम से (रहा किनारे बैठ)- गऱीबी अमीरी है कि़स्मत का सौदा मिलो आदमी की तरह आदमी से

 मध्यप्रदेश की डायरी: भोपाल ब्यूरो चीफ  प्रणव पारे की कलम से (रहा किनारे बैठ)- गऱीबी अमीरी है कि़स्मत का सौदा मिलो आदमी की तरह आदमी से

 
नए-नए महाराजा बनाम नोवा रिच फ्रेंच भाषा में एक शब्द है नोवा रिच ( Nouveau rich) इस शब्द का उपयोग उस नवधनाढ्य वर्ग के लिए किया जाता है जो एक पीढ़ी से ही पैसे वाला बना है न की पीढिय़ों से, कुल मिलकर खानदानी पैसे वालों में और नवधनाढ्य के अंतर को सपष्ट करता हुआ शब्द है और इस सन्दर्भ में थोड़ा अपमानजनक भी है। मध्यप्रदेश में मामला उल्टा है जब कांग्रेस पार्टी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को भू-माफिया साबित करने के लिए अपने सर्वाधिक योग्य व्यक्ति के के मिश्रा को ग्वालियर में इस मिशन पे लगाया तो उम्म्मीद थी कि कुछ ठोस निकलेगा लेकिन तमाम कोशिशों के बाद नतीजा वैसा नहीं मिला जैसी की उम्मीद की जा रही थी। सिंधिया राजघराने की सम्पत्तियों और रईसी को लेकर मध्यप्रदेश की जनता में कई कथाएं प्रचलित है जिसके कारण आम जनता के लिए सिंधिया पर भूमाफिया जैसे आरोपों पर भरोसा करना मुश्किल हो सकता है। इन्ही कथाओं को भूमिका बनाते हुए  ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खुद पर लगाए जा रहे भूमाफिया होने के आरोपों पर पलटकर तीखा हमला किया और कहा कि हमारे परिवार कि तो तीन सौ साल से भी ज्यादा पुरानी संपत्ति है लेकिन सवाल उन लोगों से है जो नए-नए महाराज बने हैं, सिंधिया का इशारा साफ़ तौर पर कमलनाथ और दिग्गविजय सिंह पर ही था। एक तरह से नोवा रिच बोलकर सिंधिया ने कुछ न कहते हुए सब कुछ कह दिया। राजनैतिक पंडित अनुमान लगा रहे हैं कि सिंधिया का इतना बोलना ही काफी है बाकि कसर कांग्रेस के कुछ उत्साही नेता निकाल सकते हैं।

हलक से निकलता हल्कापन
अशोक नगर विधान सभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के बड़े नेता और स्वर्गीय सुभाष यादव के बड़े पुत्र अरुण यादव अपने पिता की तरह दबंग और गरिमामय व्यक्तित्व शायद ही विकसित कर पाए लेकिन उनके जैसा बनने की चाह में उनके बोल उस समय बिगड़ गए जब वो सारी मान-मर्यादा भूलकर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उनके पूरे परिवार को गद्दार बोल गए और उन सभी कि तुलना वफादार कुत्ते से कर डाली। दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने सिंधिया परिवार के खिलाफ  एक आक्रामक मुहिम छेड़ दी है जिसमें ग्वालियर राजपरिवार की पुरानी सम्पत्तियों में हुए कथित तौर पर हुए घोटालों को उजागर करने का अभियान छेड़ दिया है। दरअसल, सिंधिया के एक पूर्वज की मृत्यु के साथ ही उनके वफादार कुत्ते की भी मौत हो गई थी। इस घटना से व्यथित राजपरिवार ने उस वफादार कुत्ते की भी समाधि बनवाई थी। कालांतर में इन दोनों ही समाधियों को राजपरिवार ने कथित तौर पर खुर्द-बुर्द कर दिया ऐसा आरोप कांग्रेस ने सिंधिया परिवार पर लगाया है। अरुण यादव ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए यहां तक  बोल दिया कि वो कुत्ता तो कम से कम वफादार था पर ये तो वफादार भी नहीं है। चुनाव अपनी जगह है लेकिन अमर्यादित भाषा में अब कोई भी राजनैतिक दल पीछे नहीं है। अब जनता ही तय करेगी कौन क्या है बाकि चुनाव परिणामों से पहले ही उग्र और अमर्यादित होते बोल  वचन जनता नहीं भूलती ऐसा इतिहास में कई बार साबित हो चुका है।

अँधा क्या मांगे दो आंख
देश के कई राजनीतिज्ञ खुद को भूखा-नंगा साबित करने में जीवन लगा देते हैं क्या क्या जतन नहीं करते कि कोई तो भूख-नंगा बोल दे लेकिन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इस मामले में बहुत ज्यादा भाग्यशाली निकले।  दरअसल, किसान कांग्रेस के अध्यक्ष दिनेश गुर्जर ने एक चुनावी सभा में मुख्यमंत्री कमलनाथ की तारीफ  करते करते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को भूखा नंगा बता दिया अब ये सेल्फ गोल ही माना जायेगा क्योंकि अभी हाल में ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पर अपरोक्ष रूप से तीखा हमला किया था और कहा था कि नए-नए महाराजाओं से सवाल पूछिए की इतनी दौलत कहां से आयी, अब एक तरह से सिंधिया की बातों की पुष्टि खुद दिनेश गुर्जर ने शिवराज को भूखा नंगा और कमलनाथ को देश का दूसरा अमीर मुख्यमंत्री और उद्योगपति बताकर कर दी है। इस बयान के बाद कांग्रेस की सिटी-पिट्टी गुम हो गई है अब करें तो करे क्या शिवराज सिंह ने राशन पानी लेकर चढ़ाई कर दी है। मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक अरसे से ये आवश्यकता महसूस की जा रही है कि पार्टी के कई नेतों का सेन्स ऑफ  पॉलिटिक्स दोयम दजऱ्े का है जिसके लिए बकायदा प्रशिक्षण की आवश्यकता है चाहे आप जीतू पटवारी को ले लो या दिनेश गुर्जर को कब क्या बोलना है क्यों बोलना है पता ही नहीं होता। अभी जीतू पटवारी ने सांवेर में एक महिला को जबरन माइक थमा दिया था और कस्मे देकर पूछा कि आप ही बताइये कमलनाथ की सरकार में क्या कमियां थी अब महिला ने दो टूक जवाब दे दिया। कमियां तो बहुत थी अब जीतू पटवारी ये उम्मीद कर रहे थे कि ये महिला पक्ष में ही बोलेगी लेकिन फिर से हो गया सेल्फ  गोल अब कमलनाथ इंदौरी स्टाइल में केवल इतना बोल सकते हैं इन दोनों महानुभावों से तुम्हारे इतने इतने हाथ जोड़ूँ यार भिया चा चाह क्या रय हो यार दादा मेरी क्या बारा बजाके मानोगे।

चलते चलते
बहरहाल, मध्यप्रदेश में चुनावी जंग में शाह-मात बजी कभी इधर अभी उधर और बयानबाजी से ऊपर नीचे हो रही है। कांग्रेस पार्टी के विश्वस्त सूत्र बता रहे है की पार्टी बारह से ज्यादा सीटों पर तो भाजपा को 20 से ज्यादा सीटों पर विजय  की उम्मीद है दो से तीन सीटों पर बहुजन समाज पार्टी का ज़ोर दिखाई दे रहा है। बाकी पर अन्य या निर्दलीय उम्मीदवारों के जीतने की संभावना दिखाई पड़ रही है लेकिन आगे ऐन वक्त पर हवा का रुख क्या होगा वो जनता ही जाने।