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हिंदी के सम्मान में "कविता और हम" की ओर से आयोजित कार्यक्रम में राजधानी के कवि शामिल हुए

हिंदी के सम्मान में

रायपुर, 15 सितंबर। बच्चा जिस शब्द का सबसे पहले उच्चारण करता है वो शब्द मां है, और जो भाषा भावनाओं को शब्द दे वो भाषा मातृभाषा है। अपनी मातृभाषा हिंदी के सम्मान में 14 सितंबर हिंदी दिवस के दिन जलविहार स्थित नुक्कड़ टैफे में "कविता और हम" की ओर से कविता पाठ का आयोजन किया गया, जिसका संचालन किशोर वैभव ने किया। कार्यक्रम में संस्था के सदस्यों और रायपुर के कविता प्रेमियों द्वारा अनेक कविताओं का पाठ किया गया, जिनमें बहुत से ऐसे नवोदित कवि थे जिन्होंने पहली बार अपने लिखे शब्दों को आवाज दी, और कई कविता प्रेमियों ने बहुत प्रख्यात और हिंदी के दुलारे कवियों कविताओं का पाठ किया। 

स्वरचित कविताओं में तुषार जोशी ने "मैं पुरुष हूं, खुद को मर्द कहूंगा" पढ़ी जिसकी पंक्तियां थी "तुम सामान मेरी, ये रिश्ता मेरी जागीर है, यह चलता फिरता बूत, मेरी खरीदी हुई तस्वीर है" मनीष जैन ने "क्या छोड़ चले हम" और संस्था के सदस्यों ने रामधारी सिंह दिनकर कविता आग की भीख, केदारनाथ सिंह की कविता चट्टान को तोड़ो, पाश की कविता मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती और अन्य कई कविताओं का पाठ किया।