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कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः चिड़िया उत्तर देती है

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः  चिड़िया उत्तर देती है


चिड़िया

मगर की दाढ़ों में फँसे

माँस के टुकड़े चुगती है

विचरती उसके मुख में

निर्भय


रोज़ किनारे पर

विकराल मुख खोले

लेटा रहता है मगर

नये शिकार के लिए 

उसकी दाढ़ें माँजती 

चिड़िया

प्रश्न नहीं पूछती है

घोंसला


तिनका-तिनका

सुख बटोरती चिड़िया

तिनका-तिनका

सुख उड़ाती हवा

जब जंगल

खो रहा विन्यास

एक घोंसला है

नंगे वृक्ष पर

अण्डा सेती चिड़िया

मरने से पहले

उत्तर देती है