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कथा-समाख्या 5 सवाई माधोपुर वीडियो रिपोर्ट पार्ट-1

कथा-समाख्या 5 सवाई माधोपुर वीडियो रिपोर्ट पार्ट-1

कथादेश दिल्ली और छत्तीसगढ़ फिल्म विजुअल आर्ट सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में सवाई माधोपुर राजस्थान में आयोजित तीन दिवसीय कथा—समाख्या के पाँचवें आयोजन के पहले दिन युवा कथाकार अक्षत पाठक मुम्बई और जगदीश सौरभ बिलासपुर की कहानी पर परिसंवाद आयोजित किया गया।

कहानी में नवोन्मेष विषय पर केन्द्रित इस कार्यक्रम में पहले दिन अक्षत पाठक की कहानी आधे का पूरा एक हो जाना पर केन्द्रित अपने आधार वक्तव्य में कथाकार आनंद हर्षुल रायपुर ने कहा कि इस कहानी को पढ़ते हुए इसकी सधी हुई भाषा ध्यान आकर्षित करती है.  कथा लेखन की प्रकिया में ऐसी स्थिति भी आती है जब भाषा यथार्थ को रचने लगती है. हिन्दी कहानी सामान्यतः भाषा की उतनी चिंता नहीं करती, जितनी यथार्थ की हुबहू प्रस्तुति की. आलोचक रविभूषण रांझी ने कहा कि यह दाम्पत्य के बचे रहने की कहानी है. इसमें स्थान महत्वपूर्ण नहीं है, भाव महत्वपूर्ण है. आज के भावहीन समय में यह भावपूर्ण कहानी है.

कथाकार योगेन्द्र आहूजा दिल्ली ने कहा कि आज कहानी पूर्णत तथ्य केन्द्रित हो गई है, यह कहानी रूढ़ियों को तोड़ती है. जिन चीजों को हम भूल गये हैं उन्हें याद करती है. आलोचक हिमांशु पंडया जयपुर ने कहा कि अक्षत पाठक की इस कहानी को विलक्षण बिम्बधर्मिता के लिए जाना जायेगा. अपने काव्यात्मक सौंदर्य के बल पर यह कहानी अपने को बार बार पढ़ा सकती है. कथाकार रामकुमार सिंह मुम्बई ने कहानी के कुछ प्रसंगो का उल्लेख करते हुए कहानी के कुछ मार्मिक संकेतों को रेखांकित किया. कथाकार और नाट्य समीक्षक ह्रषिकेश सुलभ पटना ने प्रश्न उठाया कि कविता के उपकरणों से लिखी गई यह कहानी क्या कविता होने से बच पाई है ।


सुभाष मिश्र रायपुर ने कहा कि पहले दृश्य में सोचते हैं फिर लिखते हैं, दृश्य में सोचना उनकी भाषा को काव्यात्मक बनाता है. कथा समाख्या के स्थानीय आयोजक एंव कथाकार सत्यनारायण ने कहा कि इस कहानी में छोटी छोटी चीजों के माध्यम से जीवन की गहरी समझ और उसके प्रति ललक दिखाई पड़ती है. युवा कथाकार जगदीश सौरभ बिलासपुर ने कहा कि जैसे कटहल फूटकर महकता है वैसे ही यह कहानी है.

गोष्ठी का संचालन करते हुए आलोचक जयप्रकाश, दुर्ग ने कहा कि इस बात पर विचार किये जाने की ज़रूरत है कि कहानी को कविता तक जाना चाहिए या नही लेकिन कहानी जीवन के अंतर्विरोधों का सामना करें तभी वह बेहतर कहानी हो सकती है. समापन वक्तव्य में वरिष्ठ कथाकार जितेन्द्र भाटिया ने कहा कि इस कहानी में एक यात्रा है. यह कमरे के घर हो जाने की कहानी है. उन्होंने कहा कि कविता के गंध से कथाकारों को सीखने की ज़रूरत है. मुखर रूप से कहने से कई बार सौंदर्य नष्ट हो जाता है.

इस कहानी के लेखक अक्षत पाठक ने कहानी के संबंध में अपने अनुभवों का उल्लेख किया. इस आयोजन में कवि विनोद पदरज सवाई माधोपुर, सिनीवाली शर्मा भागलपुर, अभिषेक पांडे दिल्ली और कथादेश के संपादक हरिनारायण भी उपस्थित थे. दूसरे सत्र में जगदीश सौरभ की कहानी ना तुझे पता ना मुझे पता पर चर्चा की गई. कथाकार रामकुमार सिंह मुम्बई ने आधार वक्तव्य दिया.