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निगम आयुक्त से मुलाकात-मुश्किल ही नहीं नामुमकिन

निगम आयुक्त से मुलाकात-मुश्किल ही नहीं नामुमकिन


संजय जैन

धमतरी, 14 जनवरी। जिले में पदस्थ अधिकांश अधिकारी अपने कर्तव्यों का सहीं रूप से निर्वहन करते आ रहे हैं। कलेक्टर रजत बंसल ने कलेक्टोरेट अथवा कंपोजिट बिल्डिंग में उनके आने-जाने के समय को लेकर वहां उपस्थिति मशीन लगा दी है जिसके चलते देर से आने वाले अधिकारी भी समय पर पहुंचकर अपने अपने कार्यालयों में बैठकर कार्य संपादित करते आ रहे हैं। लेकिन नगर निगम एक ऐसा कार्यालय है जहां मुखिया निगम आयुक्त से मुलाकात मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी साबित हो रही है। इनके अडिय़ल एवं नादिरशाह रवैये के चलते आम नागरिकों की समस्याएं निराकृत नहीं हो पा रही है जिसे लेकर आज प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आगमन पर लोगों ने उनकी शिकायत किये जाने का निर्णय लिया है।

नगर निगम शहर के आम नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये वर्षों से कार्य कर रही है। ऐसा माना जा रहा था कि निगम बनने के बाद नागरिकों की छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी समस्याएं त्वरित गति से दूर हो जायेंगी। लेकिन यहां बैठे अधिकारी एक ओर बाऊंड्री वॉल निर्माण के नाम पर संबंधित मकान मालिकों को न सिर्फ बाऊंड्री बल्कि उसमें बिना अनुमति आलीशान मकान, होटल बनाये जाने की छूट देते हैं। इसके अतिरिक्त चुनाव के पूर्व जितने भी निर्माण कार्य संपादित हो रहे हैं उसमें कमीशनखोरी के चक्कर में भारी भ्रष्टाचार की जानकारी प्राप्त हुई है। पूर्व वर्षों में बालक चौक स्थित काम्पलेक्स के निर्माण में लगे ठेकेदार द्वारा कार्य को अधूरा छोड़ दिये जाने के परिप्रेक्ष्य में उसकी जमा राशि न सिर्फ राजसात की जानी चाहिये थी बल्कि उस पर विधिवत कार्यवाही की जानी चाहिये थी परंतु तत्कालीन आयुक्त ने उसे न सिर्फ उसकी जमा राशि वापस कर दी बल्कि उसके रनिंग बिल का भी भुगतान कर दिया। इस वक्त नगर निगम द्वारा भवन निर्माण विकास शुल्क के नाम पर भी निर्धारित राशि से अधिक राशि की वसूली की गई जिसकी शिकायत जिले के प्रभारी मंत्री कवासी लखमा को विश्राम भवन में कुछ लोगों ने की जिस पर मंत्री ने तत्काल संज्ञान लेते हुए उक्त अधिकारी को यहां से स्थानांतरित करवा दिया। इनके स्थान पर राजस्व विभाग के अधिकारी को निगम का आयुक्त पद पर नियुक्त किया गया है। जैसे ही इन्होंने चार्ज लिया था, शहरवासियों को इनसे काफी आशाएं थीं। लेकिन ये आशाएं इनकी क्षणभर में धूमिल हो गई।

मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि चुनाव के पूर्व से आये निगम आयुक्त अधिकांश समय कार्यालय से नदारद रहते हैं। पूछने पर कोई भी कर्मचारी उनके संबंध में जानकारी नहीं देता। उन्हें मोबाईल लगाओ तो मोबाईल भी वे नहीं उठाते जिसके कारण शहर के अंदरूनी वार्डों में निवासरत लोगों को पानी, सफाई जैसी व्यवस्था के लिये नगर निगम कार्यालय का चक्कर काटना पड़ता है। संबंधित विभाग के अधिकारी भी आयुक्त के नहीं रहने से इधर उधर मटरगश्ति करते हुए मोबाईल में लीन रहते हैं। सीधे मुंह बात तक नहीं करते। ऐसे ही कुछ कर्मियों को निगम से हटाकर बाहर भेजा गया। उनका प्रभार बदला गया। लेकिन इसके बाद भी निगम के अधिकारी, कर्मचारियों की कार्यशैली नहीं बदली। सभी की आशाएं आयुक्त से मिलने की होती है क्योंकि जो कर्मचारी कुर्सी पर नहीं मिलता उसकी शिकायत भी कमिश्रर से की जाती है परंतु उनके न रहने से आम नागरिकों की समस्याएं न तो दूर हो रही हैं और न ही उन्हें संतुष्टिप्रद जवाब मिलता। जब ऐसे लोग आयुक्त को फोन लगाते हैं तो वे फोन भी नहीं उठाते। यह क्रम जबसे उन्होंने पदभार ग्रहण किया है, तबसे जारी है। कुछ लोगों ने तो यहां तक कहना शुरू कर दिया है कि निगम आयुक्त से मुलाकात मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। इस तरह के बोल चौक-चौराहों में चर्चित हैं। अब ऐसे पीडि़त और उपेक्षित लोग संग्रहित होकर आयुक्त के विरूद्ध मुख्यमंत्री श्री बघेल को एक शिकायत आज करेंगे। अब देखना है कि कांग्रेस की पहली पारी में ऐसे लापरवाही अधिकारियों की चलती है या फिर नई सत्ता के पदाधिकारियों की। चर्चा तो यह भी है कि निगम में पूर्व पदस्थ एक कर्मचारी द्वारा ठेकेदारों से भुगतान के एवज में एक प्रतिशत की राशि ली जाती थी लेकिन वर्तमान में उक्त राशि को दो प्रतिशत वसूली किये जाने की जानकारी प्राप्त हुई है।