कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः कपड़े पहनने की इच्छा

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः कपड़े पहनने की इच्छा


जन-हित में कपड़़े पहनता हूँ

इच्छा तो नंगा रहने की है


सब एक-दूसरे को 

नंगा करने पर उतारू हैं

तभी तो चाहते हैं

सब कपड़े पहने रहें


कपड़ा बेचने वाले भी

कपड़ों की ओट से

नंगा करते हैं अभिनेत्री को

जाँघिए बेचने की कोशिश में

नंगे हुए जा रहे अभिनेता

कपड़े बदल-बदल कर

नंगई से भरे हुए हैं नेता


जब नंगे हुए बिना

नहीं बेचे जा सकते कपड़े

तो उन्हें कोई खरीदे क्यों

नंगा ही रहे


कपड़े पहनने की इच्छा

नंगई पर उतारू होने की शुरुआत है