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Video: संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम में जयंत देशमुख और आलोक चटर्जी ने रंगमंच और सिनेमा पर चर्चा की

Video: संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम में  जयंत देशमुख और आलोक चटर्जी ने रंगमंच और सिनेमा पर चर्चा की

मुक्तिबोध राष्ट्रीय नाट्य समारोह के अंतिम दिन आज दोपहर संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम में रंगमंच और सिनेमा पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें जयंत देशमुख और आलोक चटर्जी ने चर्चा की। 


आलोक चटर्जी ने सिनेमा और रंगमंच के विषय में चर्चा करते हुए कहा कि सिनेमा का पैराग्राफ अलग है जिस तरह के सिनेमा आजकल बन रही है इसमें कुछ लोगों को छोड़ दें तो इंडस्ट्री संस्कार हीन हो गई है. घटिया दुनिया को घटिया तरीके से दिखाया जा रहा है. अच्छे एक्टर हैं लेकिन पूंजी देने वालों की कमी है. वर्तमान में ज्यादातर मनोरंजन के लिए फिल्म बनाई जाती है, जिसमें साहित्य नदारद होती है. रंगमंच से जुड़े व्यक्तियों को अभिनय करना सुकून देता ही है साथ ही यह साहित्य को जीवित रखता है. सिनेमा को रोका जा सकता है लेकिन थिएटर को नहीं रोक सकते है. इमरजेंसी के दौरान में जब फिल्म मेकर्स ने फिल्म बनाने की हिम्मत नहीं दिखाई तब रंग कर्मियों ने अपने हिम्मत का परिचय दिया था. और पूरे देश में थिएटर के माध्यम से एक नए विचार धारा का प्रवाह शुरू किया था. 

उन्होंने कहा, एक डॉक्टर सिर्फ डॉक्टर हो सकता है, शिक्षक सिर्फ शिक्षक हो सकता है लेकिन एक अभिनेता एक ही जीवन में सारे किरदार एक साथ जी सकता है.


 जयंत देशमुख  ने सिनेमा और रंगमंच के विषय में चर्चा की

 जयंत देशमुख  ने सिनेमा और रंगमंच के विषय में चर्चा की