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सुप्रीम कोर्ट में जल्द स्थायी तौर पर 5 जजों की संविधान पीठ

सुप्रीम कोर्ट में जल्द स्थायी तौर पर 5 जजों की संविधान पीठ


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में जल्द ही एक स्थायी नियमित संवैधानिक बेंच की नियुक्ति की जा सकती है। 70 साल के देश के न्यायिक इतिहास में शायद ऐसा पहली बार हो सकता है कि 5 जजों की स्थायी संवैधानिक बेंच का गठन किया जाए। संवैधानिक मामलों से जुड़े सवाल और कानून की व्याख्या से जुड़े ऐसे सभी मामलों की सुनवाई यह पीठ करेगी।

सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या अभी 34 है
1950 में सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस समेत कुल जजों की संख्या 8 थी। अभी जजों की संख्या 34 है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने संबंधी पत्र के बाद हाल ही में संसद से एक संशोधन के जरिए जजों की संख्या बढ़ाई गई। जस्टिस गोगोई ने पत्र में जजों की संख्या कम होने के कारण काम के अतिरिक्त दबाव का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री से तत्काल इस दिशा में कदम उठाने की मांग की थी।
1 अक्टूबर से स्थायी संविधान पीठ होगी
सुप्रीम कोर्ट में अब कुल 34 जज हैं और इस बढ़ी हुई संख्या के बाद 1 अक्टूबर से सुप्रीम कोर्ट में स्थायी 5 जजों की संविधान पीठ होगी। अभी तक की सामान्य प्रक्रिया रही है कि 2 जजों की बेंच किसी मुद्दे को 3 जजों की बेंच के पास भेजती है। 3 जजों की बेंच यदि मामले को उचित समझे तो महत्वपूर्ण केस संवैधानिक पीठ के पास भेजती है।
संविधान पीठ के पास महत्वपूर्ण केसों की बड़ी संख्या
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ही अब तक केसों की संख्या को देखते हुए और अन्य महत्वपूर्ण केसों में जजों की भागीदारी के आधार पर 5 जजों की संविधान बेंच तैयार करते हैं। पिछले 3 दशक से 5 जजों की संविधान पीठ का गठन चीफ जस्टिस के लिए हमेशा मुश्किल रहा है। केसों की संख्या में हो रही वृद्धि और सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिट अधिकार क्षेत्र को विस्तार देने के बाद से जनहित याचिकाओं की संख्या में भी बड़ी वृद्धि देखने को मिली है। संविधान पीठ के पास इस लिहाज से एक ही वक्त में काफी बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण मामले होते हैं।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 3 जजों की बेंच का भी करेंगे गठन
सुप्रीम कोर्ट में इस वक्त 164 मामलों को 3 जजों की बेंच के पास सुनवाई के लिए भेजा गया है। चीफ जस्टिस गोगोई लंबे समय से पेंडिंग पड़े ऐसे 164 मामलों की सुनवाई के लिए 3 जजों की स्थायी 5 बेंच का भी गठन करने जा रहे हैं। मौजूदा हालात में सिर्फ एक या 2 ही स्थायी 3 जजों की बेंच है जो दैनिक आधार पर मामलों को देख रही है। इन बेंच के पास भी पहले से ही इतने केस रोज की सुनवाई के लिए रहते हैं कि लंबित केसों की सुनवाई के लिए पर्याप्त वक्त नहीं मिल पाता है।