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डॉ. मजूमदार की अवैध सदस्यता का मामला सोनिया गांधी तक पहुंचा, छत्तीसगढ़ दंत चिकित्सा परिषद की भूमिका संदिग्ध

डॉ. मजूमदार की अवैध सदस्यता का मामला सोनिया गांधी तक पहुंचा, छत्तीसगढ़ दंत चिकित्सा परिषद की भूमिका संदिग्ध

रायपुर. राज्य सरकार की ओर से डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया में सदस्य नामित हुए डॉ. दिव्येंदु मजूमदार का मामला अब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तक जा पहुंचा है। मामले को समझने के बाद शिकायत को स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर भेजा गया है जिसके बाद निहारिका बारीक सिंह इसकी जांच कर रही हैं। 


दूसरी ओर डॉ मजूमदार की गड़बड़ियों के नित नए पन्ने खुल रहे हैं। आज खुलासा हुआ है कि उनकी सदस्यता को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी गलत माना था। 65 वर्ष की आयु पूरी करने वाला कोई भी डॉक्टर दंत परिषद का सदस्य नही बन सकता जबकि मजूमदार 69 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं। 

इस खुलासे के बाद छत्तीसगढ़ दंत चिकित्सा परिषद की भूमिका पर भी शक के बादल छा गायब हैं। आखिर उसने डॉ मजूमदार को सदस्यता कैसे दे दी? केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन को की गई शिकायत में कहा गया था कि डॉ मजुमदार ने डीसीआई की सदस्यता पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। 
 
इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया को निर्देश जारी करते हुए इस बात पर आपत्ति की थी कि दंत चिकित्सा परिषद अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अवैध सदस्यों के नाम भी अधिसूचित कर रहा है।

दंत चिकितसा अधिनियम, 1948 के प्रावधान के अनुसार, केंद्र सरकार को परिषद का गठन करने का अधिकार देता है और परिषद के सदस्य की सदस्यता केवल तभी मान्य होती है, जब वह केंद्र सरकार द्वारा एक आदेश या अधिसूचना द्वारा नियुक्त किया जाता है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के बिना डीसीआई अपनी वेबसाइट पर सदस्यों के नामों को सूचित करने के लिए वैध नही है लेकिन डॉ मजूमदार का नाम दिया गया है। मंत्रालय के पत्र क्रमांक ११२०२५ / १२० / २०१ ९-डीए में दिनांक ११ सितंबर २०१९ को इसका खुलासा किया गया था। 

विगत 11 सितंबर 2019 को मंत्रालय ने डीसीआई को सूचित किया था कि डॉ.मजुमदार की सदस्यता की अधिसूचना सरकार द्वारा नहीं बनाई जा सकती है। पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रासंगिक समय में डॉ मजुमदार की सदस्यता को मंजूरी उपलब्ध नहीं कराई थी। GOI ने यह भी बताया कि चूंकि डॉ मजुमदार 9 जुलाई 2019 को 65 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके हैं, DCI विनियमों के अनुसार, उन्हें विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार भी किसी भी विश्वविद्यालय के दंत शिक्षक / संकाय के रूप में नहीं माना जा सकता है। 

आश्चर्य कि इन्ही नियमों का हवाला देते हुए यूपी, राजस्थान सरकार ने डॉ मजूमदार को सदस्यता देने से इनकार कर दिया था। इसके विपरीत छत्तीसगढ़ दंत परिषद ने डॉ मजूमदार को ना सिर्फ सदस्य बनाया बल्कि उन्हें मान्यता भी दे दी। इसी आधार पर राज्य सरकार ने मजूमदार को भारतीय दांत परिषद में सदस्य नामित किया है। 

केंद्रीय मंत्रालय ने यह भी निर्देशित किया था कि भारत सरकार ने स्पष्ट रूप से यह भी सुनिश्चित करने को कहा था कि डॉ. मजुमदार को डीसीआई की आधिकारिक फाइलों और कागजों का आकलन करने की अनुमति नहीं है। 

दुर्भाग्यवश, मंत्रालय के उपरोक्त निर्देशों का पालन करने के बजाय, डॉ.सब्यसाची साहा, सचिव DCI, जिन्हें अवैध रूप से डॉ. मजुमदार द्वारा सचिव नियुक्त किया गया था, ने उन्हें सभी गोपनीय मामलों सहित सभी आधिकारिक फाइलों का आकलन करने की अनुमति दी और सचिव डॉ. मजुमदार की खुली मिलीभगत से सभी को छुट्टी दे दी। 

स्वास्थ्य मंत्रालय ने दो बार तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय से डॉ मजुमदार की सदस्यता की अस्वीकृति दी थी। इसके बाद भी डॉ. मजुमदार ने 9 जुलाई 2019 को 65 वर्ष की आयु प्राप्त की है जो सेवानिवृत्ति की अधिकतम आयु है और उनकी सदस्यता भी अधिसूचित नहीं की जा सकती। ऐसे में राज्य सरकार को चाहिए कि डॉ मजूमदार की नियुक्ति रद्द कर किसी छत्तीसगढ़ के योग्य दंत चिकित्सक को डीसीआई में सदस्य बनाकर भेजे। 

डॉ अनिल खाकरिया ने कहा कि डॉ मजूमदार ने रायपुर के समता कॉलोनी के जो निवास का पता दिया है, वहां पर भी कोई नही रहता। डॉ मजूमदार की नियुक्ति से छत्तीसगढ़ के डॉक्टरों में आक्रोश है. इससे नाराज कुछ लोगों ने राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डे तक मामला पहुंचा दिया है. नईदिल्ली में आज उनसे एक दल ने डॉ.मजूमदार के तथाकथित फर्जीवाड़े को लेकर शिकायत की है तथा मामले में हस्तक्षेप की मांग की है. दूसरी ओर पूरे मामले में छत्तीसगढ़ डेंटल कौंसिल की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है.