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अतिसंवेदनशील अबूझमाड़ में स्वास्थ्य केन्द्र खोलने की मंजूरी

अतिसंवेदनशील अबूझमाड़ में स्वास्थ्य केन्द्र खोलने की मंजूरी


नारायणपुर, 09 दिसंबर |  बस्तर के में नारायणपुर जिले के अतिसंवेदनशील अबूझमाड़ क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खोलने की मंजूरी दी गई है, वहीं 37 गांव में उप स्वास्थ्य केन्द्र झोपड़ी, आंगनबाड़ी और घोटुल में चल रहे है।

जिला प्रशासन के सूत्रों ने बताया कि प्रशासन द्वारा अबूझमाड़ के पहुंच विहीन गांव में स्वास्थ्य साथी के नाम से गांव के पढ़े-लिखे लड़कों को स्वास्थ्य विभाग की मदद के काम में लगाया गया है और 15 स्वास्थ्य साथी अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जो अंदरुनी इलाकों में जाकर बीमार लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए पास के स्वास्थ्य केंद्र पर ला रहे हैं।

जिला प्रशासन की इस पहल से गर्भवती महिलाओं से लेकर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को नया जीवन मिला है।

स्वास्थ्य साथी के लोगों को संजीवनी की संज्ञा दी गई है।

नारायणपुर कलेक्टर पीएस एल्मा ने बताया कि अबूझमाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर विशेष पहल की जा रही हैं।

भवन विहीन केंद्रों में नए भवन बनाने की स्वीकृती दी गई है।

अबूझमाड़ में अधिकांश गांव में घोटुल की परंपरा अब भी जीवित है।

गांव के बीच में लकड़ी और फूस की एक झोपड़ी और अहाता होता है।

यहां आदिवासियों के वाद्य यंत्र व श्रृंगार के सामान रखे होते हैं।

घोटुल आमोद प्रमोद के सांस्कृतिक केंद्र हैं।

यहां रात में अविवाहित युवक- युवतियां एकत्र होकर नाच गान करते हैं।

यहीं जोड़े बनते हैं, जो जीवन साथी बन जाते हैं।

इस इलाके में नक्सलवाद ने कदम रखे तो घोटुलों का स्वरूप भी बदला।

घोटुल में लाल क्रांति के गीत गूंजने लगे।

फिर सरकार ने शिक्षा का प्रसार जंगलों तक किया तो घोटुल शिक्षा का मंदिर यानी स्कूल बन गए।

अब यही घोटुल स्वास्थ्य केंद्र का काम कर रहे हैं।

सरकार ने हाल ही में स्वास्थ्य कर्मी व ग्रामीण चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति की है।

इसमें स्थानीय बोली जानने वाले युवाओं को शामिल किया गया है।

कोहकामेटा में पहले स्वास्थ्य विभाग का भवन बन रहा था जिसे नक्सलियों ने ढहा दिया है।

अब बाजार के दिनों में घोटुल में स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है।

अबूझमाड़ के 25 फीसद इलाके में स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही है लेकिन 75 फीसदी इलाका मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा है।

इस क्षेत्र में नक्सलियों का खौफ ज्यादा होने से ओरछा ब्लॉक के अधिकांश ग्राम पंचायतों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं बन पाए है।

237 गांव में स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के लिए सड़कों की सबसे बड़ी समस्या है।

फोर्स के लिए रास्ता बनाने का अंदेशा जता कर नक्सली अबूझमाड़ के अंदरूनी गांव में पुल पुलिया और सड़क निर्माण कार्य पर पाबंदी लगाए हुए हैं, इसकी वजह से माड़ के अधिकांश गांव पहुंचविहीन है और ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। 

ग्रामीणों की तकलीफों को दूर करने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा हाल के दिनों में हाट बाजारों में स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने का ऐलान किया है।

इसके बाद से ओरछा, बासिंग, कुतुल, सोनपुर और कोहकामेटा गांवों में साप्ताहिक बाजार के दिन चलित अस्पताल की सुविधा प्रदान कर लोगों का इलाज किया जा रहा है। (वार्ता)