कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः तीस जनवरी मार्ग

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः  तीस जनवरी मार्ग


चल रहा हूँ तीस जनवरी मार्ग पर

गूँज रही है मन में

उन गोलियों की आवाज़

उतर गयीं जो महात्मा गांधी की छाती में


साबरमती नदी के किनारे तक आकर

लौट गये हैं चीन के राष्ट्रपति

संसार पर छा रही है कोरनी मौत


तीस जनवरी को

केरल से आयी है मौत की पहली खबर

अब आ रहे हैं अमरीका के राष्ट्रपति

इन्द्रप्रस्थ में


11 मार्च 1953 को हुआ मेरा जन्म

सामुदायिक विकास की आधार शिला पर

अचानक शिला बदल गयी समाधि में

बिखरे रहते हैं उसके आसपास 

अंधी श्रद्धा के फूल

स्वराज्य नहीं हुआ साकार

छाती पर चढ़ बैठा बाज़ार


मृत्यु को ढोते देश में अपना जन्म दिन

मना रहा हूँ विश्व महामारी दिवस के रूप में

मेरा जन्म बिखर गया है उन लोगों में

जो महानगर को छोड़ भागते पैदल

चले जा रहे अपना गाँव ढूँढते


वे शव अनजाने

जिन्हें प्रतीक्षा है मिट्टी में मिल जाने की

उनमें अटक गया है मेरा जन्म

बापू की छाती में उतरी गोलियों की आवाज़

गूँज रही है मन में