कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः तुलसीदास की याद

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः तुलसीदास की याद


बीती सदियाँ पाँच

साँच को कैसे आये आँच

कह गये महाकवि--

दूसरों की कविता सुनकर

जो होते हैं हर्षित

कम होते हैं जग में ऐसे कवि

निज कवित्त ही लगता नीका

सरस होय अथवा अति फीका

जैसे नारी किसी नारि के

मोहित होती नहीं रूप पर

कवि अपनी कविता पर रीझें

कवि मित्रों की कविताओं पर 

कवि ही नहीं पसीजें


फँसे हुए कवि

विश्व तरंग जाल में

क्षीण हुई कविता की धारा

हृदय ताल में


श्रोता वक्ता ग्याननिधि

हुए सब इंटरनेटी

बिसर गये सब छंद-बंध

केवल रह गयी चैटी