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महापौर महिला सीट होने से नगर निगम में बनेगा नया समीकरण

  महापौर महिला सीट होने से नगर निगम में बनेगा नया समीकरण

रायगढ़,  18 सितंबर। नगर निगम के महापौर सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित होने से मेयर कई नेताओं की उम्मीदों को झटका लगा है। हालांकि वे अब अपनी पत्नी अथवा घर की किसी अन्य महिला सदस्य को टिकट दिलवाने की जुगत में लग गये हैं। वहीं एसी महिला सीट होने से भाजपा व कांग्रेस दोनों के लिए योग्य प्रत्याशी की तलाश करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। हालांकि दोनों ही संगठनों का दावा है कि महिला आरक्षित होने के बाद भी उनके पास दावेदारों की कमी नहीं है।
पिछले तीन चुनावों से रायगढ़ नगर निगम की महापौर सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित थी जिसमें एक बार कांग्रेस के जेठूराम मनहर तो दूसरी बार भाजपा के महेन्द्र चौहथा विजयी रहे। वहीं पिछले बार जनता ने किन्नर प्रत्याशी मधु बाई को मेयर का ताज पहनाया था। इस बार एक बार फिर जेठूराम मनहर एवं महेन्द्र चौहथा सहित दोनों की दलों में दर्जन भर उम्मीदवार आस लगाये बैठे थे लेकिन आरक्षण में यह सीट महिला के खाते में जाने से उनकी उम्मीदें टूट गई। वहीं आरक्षण के बाद से जिला मुख्यालय की इस सीट पर अब नये समीकरण बनने लगे हैं। दोनों ही पार्टियों को योग्य महिला प्रत्याशी का चयन करना पड़ेगा। वहीं कुछ दावेदार अब अपनी पत्नी अथवा घर के अन्य महिला सदस्य को प्रत्याशी बनाने की जुगत में लगे हैं। हालांकि दोनों ही पोर्टियों का कहना है कि उनके पास योग्य प्रत्याशियों की कमी नहीं है और दोनों ही अभी से अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। आरक्षण की घोषणा के बाद पार्टी कार्यालयों में बैठकें भी शुरु हो गई हैं। बात करें कांग्रेस की तो महिला कांग्रेस आरक्षण के बाद से ही बेहद उत्साहित है।
कांग्रेस का कहना है कि अब महिलाओं को नेतृत्व का मौका मिलेगा, और कांग्रेस इसके लिए तैयार है। कांग्रेस का कहना है कि उनके पास दावेदारों की कमी नहीं हैं। पार्टी योग्य प्रत्याश्ी का चयन कर फिर उऩके नामों को आगे बढ़ाएगी। भाजपा का कहना है कि महिलाओं का एक बड़ा वर्ग भाजपा को वोट करता है ऐसे में महिलाओं को नेतृत्व का मौका मिलता है तो ये भाजपा के लिए फायदेमंद साबित होगा।