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Ramkrishna Mishan Ashram : प्रशासन अकादमी अफसर तराशती है, रामकृष्ण आश्रम उनकी 'आत्मा' को, प्रधान संपादक सुभाष मिश्र का शोधपरक विश्लेषण

Ramkrishna Mishan Ashram : प्रशासन अकादमी अफसर तराशती है, रामकृष्ण आश्रम उनकी 'आत्मा' को, प्रधान संपादक सुभाष मिश्र का शोधपरक विश्लेषण

छत्तीसगढ़ के नवागत और पूर्व से कार्यरत अधिकारियों की कार्यकुशलता में गुणात्मक सुधार लाने के लिए सरकार छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी संचालित करती है. इसमें अफसरों को प्रशासनिक कार्यशैली और कार्यव्यवहार की बारीकियां समझाई जाती हैं. नवाचार के अंतर्गत मेरे जैसे लोग भी कला—साहित्य—संस्कृति—मानव अधिकार—जेंडर जैसे विषयों पर अपनी बात रखते हैं जो अफसरों की संवेदनशीलता को बढ़ाने में सहभागी होते हैं. नये अधिकारी यहां बहुत कुछ सीखते हैं. उन्हें दो दिनों के लिए बस्तर स्थित नारायणपुर के रामकृष्ण मिशन आश्रम भेजा जाता है. यह कोलकाता का वेल्लूरमठ स्थित आश्रम की एक शाखा है. अधिकारी यहां दो दिन रूकते हैं तथा मन में जो भी जिज्ञासाएं होती हैं, वे प्रश्नोत्तर कार्यक्रम में इसका जवाब पाते हैं। अधिकारियों को उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम के बीच दो दिवसीय यह यात्रा रहस्य, रोमांच के साथ उच्चतम अभिप्रेरणा प्राप्ति का केंद्र बनी है।

पिछले डेढ़-दो सालों में ऐसा कोई महीना नहीं है, जब प्रशासन अकादमी से प्रशिक्षार्णी अधिकारी वहां न जा रहे हों। वैसे तो नारायणपुर का रामकृष्ण मिशन आश्रम अपने उद्देश्यों के तहत शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अबूझमाड़ जैसे दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में जो काम कर रहा है, वह अनुकरणीय है। यहां के आश्रम से पढ़कर निकले बहुत से बच्चों में से कोई डीएसपी है तो कोई डॉक्टर, कोई इंजीनियर, कोई वकील, कोई प्रोफेसर, कोई जज है। नारायणपुर का यह आश्रम लगातार अपने बेहतरीन और प्रेरणादायी कार्यों का केंद्र बना हुआ है, जहां प्रतिदिन 14-15 सौ लोगों का खाना बनना एक सामान्य सी बात है।

 

पीड़ित मानवता की सेवा में उस अबूझमाड़ में—जो आज भी अबूझ है—पहुंचविहीन जैसे इलाके के हजारों निर्धन बच्चे, उनके परिवारजनों को शिक्षा, संस्कार और आधुनिक ज्ञान विज्ञान की प्रेरणा देती है यह संस्था. इसे आश्रमनुमा संस्थान कहें, विद्यालय कहें या महाविद्यालय, पूर्णत: सुसज्जित आवासीय विद्यालय की शानदार इमारतों के बीच ये कतई अहसास नहीं होता कि हम नारायणपुर जैसे पिछड़े कहे जाने वाले इलाके में हैं। आश्रम के स्कूल, उनका अनुशासन, ज्ञान, विज्ञान, संगीत और खेलकूद की उच्चतम आधुनिक सुविधाओं के साथ ऐसे बच्चों को वहां गढ़ा जाता है जिनका पारिवारिक जीवन अत्यधिक निर्धनता, गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण से ग्रस्त है। इनके माता-पिता भी शिक्षा, आधुनिकता, जागरूकता के, ज्ञान से कोसों दूर हैं। ऐसे बच्चों को निशुल्क, आवासीय शिक्षा, दोनों समय शानदार पौष्टिक भोजन, 2 बार नास्ता, ड्रेस, कापी किताब, स्वास्थ्य सुविधाएं, उन्नत कृषि, सोलर ऊर्जा, संगीत की शिक्षा, गायन वादन खेलकूद के साथ आधुनिक कंप्यूटर लैब और वो सब कुछ जो बड़े से बड़े पब्लिक स्कूलों में मिलता है। यहां स्थित इनडोर आउटडोर, बड़े बड़े स्टेडियम, आश्रम की आईटीआई इतनी विशाल आधुनिक और विकसित है कि राजधानी के बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज के लैब भी उनसे और नारायणपुर आश्रम की सुविधाओं के मामले में फीके लगेंगे।

ज्ञान,कौशल के साथ सबसे प्रमुख जो यहां मिलता है वो है मनोवृत्ति में सुधार. पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों की तादाद में आए प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारी यहां से अभिप्रेरित होकर जातें हैं. उनमें सेवा भाव, त्याग और मेहनत से नवनिर्माण करने की तरकीब सीखने की जगह बना है नारायणपुर का रामकृष्ण मिशन आश्रम. यहां के प्रमुख स्वामी व्याप्तनन्द जी और उनकी टीम द्वारा अबुझमाड़ के इन हजारों हजार बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु किये जा रहे प्रयास के परिणाम भी शानदार हैं। खेलकूद में राष्ट्रीय स्तर के विजेता हर साल निकलते हैं.

आश्रम परिसर में डेढ़ से 2 हजार बच्चे शानदार हॉस्टलों में रहकर आधुनिकतम शिक्षा ले रहे हैं। हर शाम को इन बच्चों का मंदिर परिसर में स्वामी रामकृष्णजी, मां शारदा देवी और विवेकानंदजी के भजनों पर शास्त्रीय संगीत के साथ रोज 1 घंटे की लयबद्ध प्रार्थना अत्यधिक मधुर और प्रभावपूर्ण होती है। आश्रम आने वाले आगंतुकों को इस प्रार्थना में शामिल होना अत्यधिक आनंदित करता है। भोजन बनाने की पाकशाला भी सामूहिक प्रयास से पूरी होती है, बड़े-बड़े सोलर पैनल से चलने वाले बड़े चूल्हे, रोज बच्चों को शानदार पौष्टिक भोजन जिसमें 2 से 3 सब्जी, दाल, चावल, रोटी, सलाद, फल ,पापड़, खीर, दूध सब कुछ उन्नत दर्जे का होता है। भोजन का समय अनुशासन के साथ प्रार्थना द्वारा शुरू होता है। भोजन में सब्जी, राशन सब कुछ सैकड़ों एकड़ में फैले आश्रम से ही पूरा हो जाता है यानि हर दृष्टि से आत्मनिर्भर स्वावलम्बी सफल व्यवस्था है।

आश्रम में गौशाला इतनी व्यवस्थित और आधुनिक है कि बड़े शहरों के तथाकथित गोभक्त भी शरमा जाएं। गौशाला में उन्नत नस्ल की साहीवाल, गिर आदि गायें हैं जो 200 के आसपास हैं। यहां होने वाला दूध बेचा नहीं जाता, बल्कि रोज हजारों बच्चों में ही बांट दिया जाता है। आश्रम में एक सुविधाओं से सज्जित 30 बेड का अस्पताल भी है. नारायणपुर आश्रम के प्रमुख स्वामी व्याप्तनन्द जी बताते हैं कि हम तो चाहते हैं कि यहां ज्यादा से ज्यादा लोग आएं और यहां से प्रेरणा लेकर अपने काम पर जाएं। आज भी प्रशासन अकादमी की ओर से 40 अधिकारी आए हुए हैं। अगले तीन दिन बाद भी 40 अधिकारी आने वाले हैं। प्रशासन अकादमी के माध्यम से अधिकारियों का यहां नियमित आना-जाना बना हुआ है।



महाराजजी का कहना है कि यहां पर खाना बनाने के लिए पहले लकड़ी मिलने में कठिनाई थी, पर अब मिल जाती है। इतने बड़े पैमाने पर रसोई बनाने में ईंधन की तकलीफ है. हम चाहते हैं कि राज्य के ज्यादा से ज्यादा लोग यहां आए, उनके रूकने की अच्छी व्यवस्था हो सके, इसके लिए यहां पर शासन की ओर से एक नियमित गेस्ट हाउस बनाना चाहिए। अभी हम अधिकारियों को अपने यहां और आईआईटी बिल्डिंग में रुकवाते हैं। स्वामीजी का कहना है कि आश्रम में पढ़ने वाले बच्चों का रूटीन डिस्टर्ब ना हो इसलिए हमने यहां आने वाले आंगतुक अधिकारियों के भ्रमण कार्यक्रम को इस तरह से व्यवस्थित किया है कि इस तरह से देख सकें, महसूस कर सकें। हम उन्हें यहां पर एक फिल्म भी दिखाते हैं और उनके प्रश्नों के जवाब भी देते हैं।

छत्तीसगढ़ की सेवा में आने वाले अधिकांश अधिकारियों ने नारायणपुर के इस आश्रम को पहले नहीं देखा, उनके लिए यह एक सुखद और यादगार स्मृति तो है ही साथ ही उनके भीतर के मानवीय मूल्यों और संवेदना को जगाने वाली भी। सामुदायिक विकास और ज्ञान विज्ञान को संस्कारों के साथ सीखने सिखाने के इस अभिनव तीर्थ में आकर, देखकर, अनुभव कर, जो शिक्षा मिल रही है, वो अपने आप में सबसे ज्यादा अभिप्रेरित करती है,  खासकर उनको जिन्हें प्रशासन करना है। यह सेवा भाव की शिक्षा अकादमी की लोकप्रियता का भी आधार बन रही है। ऐसे समय जब चारों ओर लोग अपने स्वार्थों में गलाकाट स्पर्धा में लिप्त हों, तब एक आश्रम जो नि:स्वार्थ भाव से सेवा में लगा है, उसे देखना निश्चित रूप से मरूस्थल में किसी झील को देखने जैसा है।

( लेखक दैनिक आज की जनधारा समाचार-पत्र तथा एकेजे न्यूज वेब मीडिया हाउस के प्रधान संपादक हैं )