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राहुल ने नोटबंदी को आतंकी हमला करार दिया, प्रियंका ने कहा- ‘तुग़लकी’ कदम की जिम्मेदारी अब कौन लेगा

राहुल ने नोटबंदी को आतंकी हमला करार दिया, प्रियंका ने कहा- ‘तुग़लकी’ कदम की जिम्मेदारी अब कौन लेगा

नई दिल्ली, 8 नवंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन साल पहले देश को संबोधित करते हुए 500 और 1000 के नोट बंद करने का एलान किया था. नोटबंदी के तीन साल पूरे होने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर शुक्रवार को हमला बोला और नोटबंदी को आतंकी हमला करार देते हुए कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए.

गांधी ने ट्वीट किया, ‘नोटबंदी आतंकी हमले को तीन साल गुजर गए हैं जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया, कई लोगों की जान ले ली, कई छोटे कारोबार खत्म कर दिए और लाखों भारतीयों को बेरोजगार कर दिया.’

उन्होंने हैशटैग ‘डिमोनेटाइजेशन डिजास्टर’ का प्रयोग करते हुए कहा कि इस निंदनीय हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के समक्ष लाया जाना बाकी है.

वहीं कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने शुक्रवार को मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नोटबंदी एक ‘आपदा’ साबित हुई है जिसने देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया. प्रियंका ने 8 नवंबर को नोटबंदी के तीन साल पूरे होने के मौके पर मोदी सरकार पर हमला बोला.

उन्होंने लिखा, ‘नोटबंदी को तीन साल हो गए. सरकार और इसके नीम-हक़ीमों द्वारा किए गए, ‘नोटबंदी सारी बीमारियों का शर्तिया इलाज’ के सारे दावे एक-एक करके धराशायी हो गए. नोटबंदी एक आपदा साबित हुई जिसने हमारी अर्थव्यवस्था बर्बाद कर दी. इस ‘तुग़लकी’ कदम की जिम्मेदारी अब कौन लेगा?’

कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी नोटबंदी को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा और उन्हें आज का तुगलक कहा. उन्होंने ट्वीट किया, ‘सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक ने 1330 में देश की मुद्रा को अमान्य करार दिया था. आज के तुगलक ने भी आठ नवंबर, 2016 को यही किया था.’

उन्होंने कहा, ‘तीन साल गुजर गए और देश भुगत रहा है क्योंकि अर्थव्यवस्था ठप हो चुकी है, रोजगार छिन गया है. न ही आतंकवाद रुका और न ही जाली नोटों का कारोबार थमा है.’ उन्होंने नोटबंदी को ‘मानव निर्मित आपदा’ बताने के लिए वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज का भारत सरकार की रेटिंग पर परिदृश्य में बदलाव करते हुए उसे घटा कर नकारात्मक किए जाने का भी हवाला दिया. सुरजेवाला ने नोटबंदी के तीन साल पूरे होने पर, सत्ता में बैठे लोगों की चुप्पी पर सवाल भी उठाए. (भाषा)