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कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः सब में कौन अरूप-सा?

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः सब में कौन अरूप-सा?


खिली कितनी धूप

कितना रूप

उजली धूप-सा


झरे कितना जल

बहे छल-छल

जीवन कूप-सा


धूप जल में

रूप जल में

कौन वह अरूप-सा

निज इच्छा, निज रूप-सा



सब के साथ खड़ी हो

ऐसी कोई बात बड़ी हो

ऐसे कोई बोल बड़े हों

सब मिल कर बोल पड़े हों


अगर नहीं हों लोग बड़े

तो छोटे-छोटे कई आदमी

हो जायें सब साथ खड़े

निज इच्छा, निज रूप धरे

सविनय-अभय-भरे