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पेंशनर्स संगठनों की संयुक्त बैठक : मुख्यमंत्री को प्रदेश के 85 हजार पेंशनरों की ओर से दिया जाएगा ग्यारह सूत्रीय मांगों पर ज्ञापन

पेंशनर्स संगठनों की संयुक्त बैठक : मुख्यमंत्री को प्रदेश के 85 हजार पेंशनरों की ओर से दिया जाएगा ग्यारह सूत्रीय मांगों पर ज्ञापन

रायपुर, 13 सितंबर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को प्रदेश के लगभग 85 हजार पेंशनरों की ग्यारह सूत्रीय मांगों के संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन द्वारा ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया गया है। ज्ञापन भेजने से पहले आज यहां तेलीबांधा तालाब के पास फेडरेशन की बैठक राज्य कर्मचारी संघ के कार्यालय में आयोजित की गई। इसमें सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं और मांगों पर विचार किया गया। इसके साथ ही राज्य के पेंशनरों को एक जुलाई 2019 से तीन प्रतिशत महंगाई राहत मंजूर करने पर मुख्यमंत्री श्री बघेल के प्रति आभार भी प्रकट किया गया। 

बैठक की अध्यक्षता राज्य संयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने की। बैठक में फेडरेशन से जुड़े छत्तीसगढ़ पेंशनर एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष गंगा प्रसाद साहू, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील पेंशनर कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष अवधेश नारायण शुक्ला और भारतीय राज्य संयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष जयप्रकाश मिश्रा सहित तीनों संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे। 

बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार मुख्यमंत्री को तीनों संगठनों के प्रांताध्यक्षों की ओर से फेडरेशन द्वारा 11 सूत्रीय मांगों पर दिए जाने वाले ज्ञापन में इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और निर्णय लेने का अनुरोध किया गया है। इसके साथ ही बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पंद्रह दिवस के भीतर मांगें पूर्ण नहीं होने पर आगामी 21 अक्टूबर को पेंशनर्स फेडरेशन द्वारा शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए मंत्रालय (महानदी भवन) के सामने दोपहर एक बजे शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा। जिन 11 सूत्रीय मांगों के संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया जाएगा, उनमें राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 धारा 49 को हटाकर पेंशनरों के आर्थिक स्वत्वों का मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के बीच बंटवारा किए जाने और वर्तमान में भोपाल स्थित केन्द्रीय पेंशन प्रोसेसिंग प्रकोष्ठ (सीपीपीसी) स्थापना छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में करने की मांगें भी शामिल हैं। इन दोनों मांगों के पूर्ण नहीं होने के कारण छत्तीसगढ़ राज्य बनने के लगभग 20 वर्ष बाद भी पेंशनरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 


ज्ञापन में मुख्यमंत्री यह भी अनुरोध किया गया है जिन पेशनरों को 1 जनवरी 1996 के पहले के पांचवे वेतनमान का एरियर्स अब तक नहीं मिल पाया है, उन्हें छत्तीसगढ़ शासन वित्त विभाग के 27 अक्टूबर 2017 को जारी आदेश के अनुरूप उन्हें 11 वर्ष तीन माह का एरियर्स दिया जाए और छठवें वेतनमान के लंबित 32 महीने के एरियर्स तथा एक जनवरी 2016 के पहले रिटायर पेंशनरों को सातवें वेतनमान के 27 महीने का एरियर्स का भी भुगतान किया जाए। 

ज्ञापन में यह भी अनुरोध किया गया है कि प्रदेश के सभी जिलों में पेंशनरों के लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए शिविर लगाए जाएं। इसके अलावा राज्य स्तरीय पेंशनर्स कल्याण मंडल का पुनर्गठन किया जाए, पेंशनर्स कल्याण निधि नियम 1997 में संशोधन कर देय राशि में वृद्धि की जाए, राज्य के पेंशनरों के पेंशन का पुनरीक्षण वर्तमान में 80 वर्ष की आयु में की जाती है, इसके स्थान पर 70 वर्ष की आयु में करते हुए उनकी पेंशन में 20 प्रतिशत की वृद्धि की जाए। ज्ञापन में मुख्यमंत्री से यह भी आग्रह किया गया कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार उन कर्मचारियों को एक जुलाई से वेतनवृद्धि (इन्क्रीमेंट) की पात्रता दी जाए जो 30 जून को सेवानिवृत्त होते हैं। फेडरेशन की ओर से ज्ञापन में यह भी आग्रह किया गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार के पेंशनरों को भी केन्द्रीय पेंशनरों के समान एक हजार रूपए मासिक मेडिकल भत्ता दिया जाए तथा राज्य शासन के रिटायर होने वाले कर्मचारियों का पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) जारी करने का अधिकार संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा से हटाकर जिला कोषालय अधिकारियों को दिया जाए। 

पेंशनर्स फेडरेशन के ज्ञापन में मुख्यमंत्री से यह भी मांग की गई है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों को संविदा नियुक्ति देने पर रोक लगाई जाए और वर्तमान में जो सेवानिवृत्ति कर्मचारी और अधिकारी संविदा पर कार्यरत हैं उन्हें हटाया जाए, ताकि राज्य के बेरोजगारों को शासकीय सेवा में आने का मौका मिल सके।