breaking news New

तेरा मेरा मनवाः आप पूछे हम बताएं, मन से मन की उलझन सुलझाएं - डॉ. ममता व्यास

तेरा मेरा मनवाः आप पूछे हम बताएं, मन से मन की उलझन सुलझाएं - डॉ. ममता व्यास

थोड़ी मात्रा में तनाव या स्ट्रेस होना हमारे जीवन का एक हिस्सा होता है। यह कभी-कभी फायदेमंद भी होता है जैसे, किसी कार्य को करने के लिए हम स्वयं को हल्के दबाव में महसूस करते हैं जिससे कि हम अपने कार्य को अच्छी तरह से कर पाते हैं और कार्य करते वक्त उत्साह भी बना रहता है। परन्तु जब यह तनाव अधिक और अनियंत्रित हो जाता है तो यह हमारे मस्तिष्क और शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। अवसाद यदि अपनी प्रारम्भिक अवस्था में हो तो यह अच्छी जीवनशैली, मनोविश्लेषण और मनोचिकित्सा (Psychotherapy) द्वारा ही ठीक हो जाता है परन्तु गहन अवसाद में उपचार की आवश्यकता होती है। आज़ मनवा में तनाव या स्ट्रेस पर बात करते हैं।

समस्या - मेरी समस्या यह है कि मेरी बेटी जब भी अपने आफिस से आती है,लगातार कई -कई घंटे टीवी देखती है| पहले मैंने यह सोचा कि मनोरंजन की दृष्टि से वह टीवी देखती होगी लेकिन गौर से देखने पर पता चला कि वह लगातार चैनल चेंज करती रहती है, और गुमसुम सी रहती है। मुझसे भी बात नहीं करती परेशान हूँ।


समाधान– थोड़ी बहुत देर टीवी देखना आम बात है लेकिन कई घंटों तक लगातार टीवी देखना और किसी भी चैनल पर ध्यान केन्द्रित ना कर पाना अवसाद के लक्षण हो सकते हैं। आपकी बेटी जरूर किसी बात को लेकर परेशान है या तो आफिस मेें या उसकी निजी ज़िंदगी में कुछ चल रहा है। आप प्यार से उससे बात कीजिये या किसी काउन्सलर के पास ले जाइए।

समस्या - मेरा छोटा बेटा जो अभी फ़िफ्थ क्लास में है, ऑन लाईन क्लास के दौरान उसे बहुत भूख लगती है | देख रही हूँ वो इन दिनों सामान्य से कुछ ज्यादा ही खाना खाने लगा है, जिससे उसका वेट भी बढ़ने लगा है। ऑन लाईन क्लास के नाम से वह चिढ़चिढ़ा हो जाता है, क्या करूं ?

समाधान– कोविड 19 के दौरान बच्चों को लगातार ऑन लाईन पढ़ाई करनी पड़ रही है जिससे छोटे बच्चों में भी डिप्रेशन देखा जा रहा है। ज्यादा भूख लगना या बिल्कुल भी भूख ना लगना ये दोनों डिप्रेशन के लक्षण हो सकते हैं। आप अपने बेटे को उसके मन पसंद काम करने दे, जब तक स्कूल बंद हैं आप उसके साथ वक्त बिताए , उसे खेलने जाने दें । अपने घर का माहौल खुशहाल रखें।

समस्या - मेरी समस्या अजीब सी है मैं एक निजी कंपनी में कार्य करता हूँ मुझे अगर किसी प्रोजेक्ट को एक महीने में पूरा करना है तो मैं पंद्रह दिन यूं ही समय बर्बाद कर देता हूँ और फिर बाकी के बचे पंद्रह दिन मैं रातों को जाग -जाग कर अपना काम कर लेता हूं, जो सबसे बेस्ट भी होता है। मेरे मित्र और मेरे सहकर्मी अक्सर मेरी इस आदत का मज़ाक बनाते हैं। मैं ऐसा क्यों करता हूँ?

समाधान– मुझे लगता है आपको तनाव  या स्ट्रेस के साथ काम करना पसंद है। कुछ लोग विपरीत हालातों में,या प्रेशर के बीच बेहतर तरीके से परमार्फ करते हैं। यह कभी-कभी फायदेमंद भी होता है कि किसी कार्य को करने के लिए हम स्वयं को हल्के दबाव में रखें ताकि अपने कार्य को अच्छी तरह से कर पाये  और कार्य करने का उत्साह भी बना रहे लेकिन ये भी ध्यान रहे कि ये तनाव अधिक और अनियंत्रित ना हो जाये है वरना यह हमारे मस्तिष्क और शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

समस्या - मैं आपसे यह जानना चाहती हूँ कि आजकल छोटे बच्चों,युवाओं और बुजुर्गों सभी को तनाव से ग्रसित देखा जा रहा है और अक्सर लोग डॉक्टर और काउन्सलर के पास जाकर उपचार करवाते हैं। दवाइयाँ लेते हैं और दवा बंद करने पर वापस फिर से तनाव का शिकार हों जाते हैं। क्या कोई ऐसा समाधान नहीं है कि तनाव होने ही ना पाये।

समाधान– देखिये अवसाद एक मानसिक स्वास्थ्य विकार होता है जो कुछ दिनों की समस्या न होकर एक लम्बी बीमारी बन सकता है। अगर हमने अपनी जीवन शैली ठीक नहीं रखी। सोने,उठने, भोजन,मनोरंजन के समय को निश्चित नहीं किया तो अवसाद तो आएगा ही। अवसाद से ग्रस्त रोगी को उचित खान-पान के साथ अच्छी जीवनशैली का भी पालन करना चाहिए। व्यक्ति को अपने परिवार और दोस्तों के साथ अधिक समय बिताना चाहिए। अपने किसी खास दोस्त से मन की बातों को कहना चाहिए। अपनी भावनाओं की शेयरिंग बहुत जरूरी होती है। साथ ही अवसाद से निकलने के लिए व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में व्यायाम, योग एवं ध्यान को अवश्य जगह देनी चाहिए। यह अवसाद के रोगी के मस्तिष्क को शान्त करते हैं। खुश रहना बहुत जरूरी है।

समस्या - क्या महिलाओं को अवसाद ज्यादा सताता है?

समाधान– जी हाँ, भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अवसाद ज्यादा होता है। खासकर घर में रहने वाली महिलाओं में डिप्रेशन ज्यादा देखा जाता है। कामकाजी महिलाओं में आत्मविश्वास ज्यादा होता है और वे खुश भी रहती हैं जबकि घरेलू महिला थकी थकी और चिढ़ चिढ़ी रहती है।