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video: कैफ़ी आज़मी का गाँव मिजवां से जुड़ी सुखद स्मृतियाँ

video: कैफ़ी आज़मी का गाँव मिजवां से जुड़ी सुखद स्मृतियाँ

देश दुनिया के तरक़्क़ी पसंद मशहूर शायर कैफी आज़मी के गाँव मिजवां में उस बेहतर दुनिया के सपनों को साकार होते देखना है जिसकी कल्पना कैफी आज़मी और उन जैसे लोगों ने कर रखी है, बेहद सुखद अनुभूति रही । इस सुखद अनुभूति के मेरे साथ साक्षी बने प्रसिद्ध अभिनेता पवन मैहरोत्रा , फ़िल्म डायरेक्टर अमित राय, मनोज वर्मा ।

हम कैफी साहब की बसायी दुनिया को देखकर उनके ही शेर 

“मैं ढूंढता हूँ जिसे वह जहाँ नहीं मिलता

नई ज़मीं नया आसमां नहीं मिलता”

से उल्ट ये कहते हैं की हमें मिजवां आकर नई जमीं  , नया आसमाँ मिला । आपके काम को देखकर नई सोच मिली ।

आज़मगढ़ फ़िल्म उत्सव से समय निकालकर एक ज़रूरी काम की तरह हम सब फूलपुर के पास मिजवां पहुँचें । पवन मैहरोत्रा ने शबाना आज़मी जी से मिजवां जाने की इच्छा ज़ाहिर की । शबानाजी ने मिजवां वेलफ़ेयर सोसायटी का कार्य देख रहे आशुतोष त्रिपाठी को फ़ोन किया, जिन्होंने हमें मिजवां में कैफी आज़मी की लोकशिक्षण और लोक कल्याणकारी विरासत से रूबरू कराया। शबाना आज़मी ने इस विरासत का विस्तार किया है। मिजवां में आज वो सब है जो एक आदर्श गाँव में होना चाहिए । 600 की आबादी वाले इस गाँव में आसपास के गाँव से मिलाकर 1400 बच्चे पढ़ने आते हैं ।

कोई तो सूद चुकाए कोई तो ज़िम्मा ले

उस इंक़लाब का जो आज तक उधार सा है ।

अपनी शायरी को हक़ीक़त में तब्दील करने वाले कैफ़ी आज़मी उन चुनिंदा शायरों में से हैं जिन्होंने रूमानियत के साथ-साथ समाज को भी अपने शायरी  में लिखा। हाल ही में उतरप्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ ने मिजवां में उनकी जन्मशताब्दी के अवसर पर साहित्यिक विमर्श आयोजित  किया जिसके बैनर अभी भी कैफी आज़मी और उनके अब्बा फ़तेह हसन की मूर्ति के पीछे लगे हुए हैं । 

महानगरी जीवन में रहते हुए इज़्ज़त सोहबत दौलत कमाने के बाद अक्सर लोग अपने गॉंव , अपनी ज़मीन की ओर नहीं लौटते पर कैफी आज़मी का गाँव मिजवां उनकी बेहतर दुनिया बसाने के ख़्वाब की हक़ीक़त था । यही वजह थी की वे हमेशा मिजवां से जुड़े रहे । उनके घर के बैठक खाने में बैठकर यूँ लगा मानो वे आकर हमसे गुफ़्तगू करेंगे ।

मेरा बचपन भी साथ ले आया 

गाँव से जब भी आ गया कोई 

मिजवां में कैफी आज़मी द्वारा खोले गये स्कूल में पढ़ती हुई सिलाई , कढ़ाई , कपड़ों पर डिज़ाइन करती लड़कियों को देखना एक नई दुनिया को साकार होते देखने जैसा है । यहाँ बैंक का ATM , ANM सेंटर ,आवासी विधालय , बच्चों लाने ले जाने के लिए बस , आपात स्वास्थ सेवा के लिए एम्बुलेंस सब कुछ है।यहाँ बनाये जाने वाले कपड़े मनीष मैहरोत्रा के फ़ैशन शो में हर साल सेलिब्रिटी द्वारा पहनकर रैम्प वॉक किया जाता है । 

मिजवां में कैफी आज़मी साहब के घर में होना उनकी शायरी , उनके तरक़्क़ी पसंद ख़्यालतों के साथ होना । जब आप इस घर में जायेंगे तो आपको कैफी आज़मी की पंसदीदा चीजों के अलावा तस्वीरों में जगह -जगह शौक़त आज़मी , शबाना आज़मी , बाबा आज़मी सहित पूरा देखने को परिवार मिलेगा । मिंजवा में एक सड़क शबाना आज़मी के नाम पर भी है । और कैफी साहब तो यहाँ हैं ही और कह रहे हैं -

“उठ मिरी जान मिरे साथ ही चलना है तुझे 

तेरी हस्ती भी है इक चीज़ जवानी ही नहीं 

अपनी तारीख़ का उन्वान बदलना है तुझे उठ मिरी जान मिरे साथ ही चलना है तुझे “