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कथा-समाख्या 5 सवाई माधोपुर वीडियो रिपोर्ट पार्ट-2

कथा-समाख्या 5 सवाई माधोपुर वीडियो रिपोर्ट पार्ट-2

कथा समाख्या 5 के दूसरे दिन देश की दो युवा महिला कहानीकारों की कहानी पर चर्चा हुई। पहले सत्र में जयपुर की दिव्या विजय की कहानी यूँ तो प्रेमी पिचत्तर हमारे पर चर्चा हुई, उसके बाद भागलपुर से आई युवा कहानीकार सिनीवाली शर्मा की कहानी महादान पर चर्चा हुई। कहानीकार योगेन्द्र आहूजा ने दिव्या विजय की कहानी पर और आलोचक कहानीकार हिमांशु पंडया ने सिनीवाली शर्मा की कहानी पर आलेख पढ़ा।

दिव्या विजय की कहानी यूँ तो प्रेमी पिचत्तर हमारे पर केन्द्रित आलेख में योगेन्द्र आहूजा ने कहा की किसी कहानी के एक से अधिक पाठ संभव हैं। एक अच्छी कहानी में नई पाठ पद्धतियाँ को आविष्कृत करने की संभावना होती है वह चीजों को पुर्नपरिभाषित करती है। यह कहानी नई परिभाषा नहीं देती लेकिन प्रचलित पाठ में अटती भी नहीं।

दिव्या विजय की कहानी पर ह्रषिकेश सुलभ ने कहा कि इस कहानी की आलोचना के उपकरण स्वयं कहानी के भीतर मौजूद हैं। इसमें कथानक का संकट है कथ्य का नही। कथानक भी कथ्य की तरह विश्वसनीयता की माँग करता है । 

जयप्रकाश ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि दिव्या विजय की कहानी में पित्तृ सत्ता, पूँजी की सत्ता और बाजार की सत्ता का मिलाजुला विमर्श है।

आलोचक रविभूषण ने दिव्या विजय की कहानी यूँ तो प्रेमी पिचत्तर हमारे के बारे में कहा कि यह बाजार के खिलाफ और   पित् सत्ता के खिलाफ जाती है। कहानी यह बताती है कि हमारे समय में बाजार की ताक़त ने मनुष्य के चित्त पर क़ब्जा कर उसमें वित्त को स्थापित कर दिया है । 

जितेन्द्र भाटिया ने दिव्या विजय की कहानी को स्त्री की मुक्ति और बाजार के प्रतिवाद की कहानी बताया। 

कथाकार सत्यनारायण ने दिव्या विजय की कहानी के बारे में कहा कि अपनी तरह से जीने की लालसा में नायिका स्वयं से साक्षात्कार करती है। 

सुभाष मिश्र ने दिव्या विजय की कहानी के संबंध में कहा कि लेखिका ने अपने को बचाकर कहानी लिखी है। नायिका में मर्दों की तरह ललक पैदा होती है। 

कथाकार आनंद हर्षल ने कहा कि दिव्या विजय की कहानी एक नई दुनिया और नये अनुभव को अन्वेषित करती है। 

सिनीवाली शर्मा की कहानी महादान पर चर्चा 

सिनीवाली शर्मा की कहानी महादान पर केन्द्रित आधार वक्तव्य में हिमांशु पंडया ने कहा कि यह कहानी के पंरपरागत सरल रेखीय विन्यास की कहानी है जिसमें आगे की घटनाओं के पुर्वानुमान की संभावना होती है। 

सिन्नी वाली शर्मा की महादान कहानी एक रेखीय ढाँचे के भीतर संश्लिष्टता पैदा होने से कहानी खूबसूरत होती है। इसका यथार्थ पुर्वानुमानित है फिर भी उसे पढऩे की उत्सुकता बनी रहती है यही इसकी सफलता है।

आलोचक रविभूषण नेे सिनीवाली की कहानी के अंतविर्रोधों और त्रुटियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कहानी की भाषिक क्षमता अद्भुत है परन्तु कथ्य और कथानक पर ध्यान देने की जरूरत है।

जितेन्द्र भाटिया ने सिन्नीवाली की कहानी पर कहा कि कहानी में संधर्ष का बिन्दु केवल नायिका की माँ है जिसके चरित्र को विकसित किया जाना चाहिए था। कथाकार सत्यनारायण ने सिन्नीवाली की कहानी के संबंध में उनकी राय थी कि उसे संवेदनात्मक रूप से और सघन होना चाहिए था।

सुभाष मिश्र ने सिन्नीवाली शर्मा की कहानी स्त्री की पीड़ा कहानी है जिसमें देशज भाषा का बहुत बेहतर और विश्वसनीय उपयोग हुआ है। कथाकार आनंद हर्षल ने कहा कि सिन्नीवाली शर्मा की कहानी थोपी हुई नहीं है।

जगदीश सौरभ ने सिनी वाली की कहानी महादान पर कहा कि यह कहानी पितृसत्तात्मक समाज की संरचनागत क्रूरता में लिपटी स्त्री दुदर्शा का आख्यान है।

चर्चा में युवा कहानीकार अभिषेक पांडे, अक्षत पाठक ने भी भाग लिया। गोष्ठी के अंत में दिव्या विजय और सिन्नी वाली शर्मा ने अपनी कहानियों से संबंधित अनुभव साझा किये।

इस आयोजन में कवि विनोद पदरज सवाई माधोपुर, सिनीवाली शर्मा भागलपुर, अभिषेक पांडे दिल्ली और कथादेश के संपादक हरिनारायण भी उपस्थित थे।