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बांग्लादेश की अदालत ने नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मोहम्मद यूनुस को जमानत दी

बांग्लादेश की अदालत ने नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मोहम्मद यूनुस को जमानत दी

ढाका, 4 नवंबर। बांग्लादेश की राजधानी ढाका की एक अदालत ने ‘ग्रामीण कम्यूनिकेशन’ के अध्यक्ष और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मोहम्मद यूनुस को तीन कर्मचारियों को बर्खास्त करने के मामले में रविवार को जमानत दे दी.

ढाका में तीसरी श्रम अदालत ने यूनुस के अदालत में पेश होने पर उन्हें जमानत दे दी.देश के सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत रूप से पेश होने के वास्ते उनके लिए सात नवंबर की समयसीमा निर्धारित की थी. अदालत ने प्रशासन से समय सीमा समाप्त होने से पहले यूनुस को गिरफ्तार करने या उन्हें प्रताड़ित नहीं करने को कहा था.

अदालत अधिकारी वसी-उर-रहमान ने कहा कि अदालत ने तीनों मामलों में 10-10 हजार के मुचलके पर उन्हें जमानत दे दी.बचाव पक्ष के वकील मुस्तफीज़-उर-रहमान ने बताया कि यूनुस को जब तक अदालत में पेश होने की जरूरत नहीं है तब तक उन्हें अभ्यारोपित नहीं कर दिया जाता है.

श्रम अदालत ने यूनुस के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था क्योंकि वह विदेश में होने की वजह से अदालत में पेश नहीं हो पाए थे.जुलाई में तीन कर्मचारियों ने मामला दायर कर कहा था कि ट्रेड यूनियन बनाने की कोशिश के कारण उन्हें अवैध तरीके से नौकरी से निकाला गया है.यूनुस ने ग्रामीण बैंक की स्थापना की थी जो गरीब लोगों को छोटे कर्ज मुहैया कराता है. उन्हें 2006 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला था. ग्रामीण कम्युनिकेशंस, ग्रामीण बैंक की आईटी इकाई है.

बीते जून में ग्रामीण कम्युनिकेशंस से बर्खास्त किए जाने के बाद कंपनी के तीन पूर्व कर्मचारियों ने प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया था. आरोप है कि कार्यस्थल पर ट्रेड यूनियन के गठन की वजह से इन्हें बर्खास्त किया गया था.इन तीनों पूर्व कर्मचारियों ने उत्पीड़न, धमकी देने और ट्रेड यूनियन बनाने की वजह से बर्खास्त करने का आरोप लगाते हुए तीन अलग-अलग मुकदमे दायर किए हैं.

मालूम हो कि मोहम्मद यूनुस साल 2015 में भी विवादों में आए थे, जब बांग्लादेश के राजस्व अधिकारियों ने 1.51 मिलियन डॉलर का टैक्स न चुका पाने की वजह उन्हें पेश होने का आदेश दिया था.

साल 2007 से 79 वर्षीय अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस की बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना से टकराव की स्थिति रही है, जब उन्होंने देश की हिंसक और ध्रुवीकृत राजनीति को लेकर हसीना के परिवार और उनकी प्रतिद्वंद्वी ख़ालिदा ज़िया को लेकर टिप्पणी की थी.

साल 2011 में यूनुस को ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था. उन्होंने इस बैंक की स्थापना की थी. पद से हटाने के इस कदम के पीछे कथित तौर पर शेख़ हसीना का हाथ होने की बात कही जाती है.यूनुस ने साल 1983 में ग्रामीण बैंक की स्थापना की थी. यह बैंक ग्रामीण इलाकों और अधिकांश तौर पर महिला उद्यमियों को बिना कुछ गिरवी रखे छोटे कर्ज मुहैया कराता है. इसकी वजह से बांग्लादेश में गरीबी कम होती देखी गई थी.

इस वजह से मोहम्मद यूनुस को वैश्विक प्रसिद्धि मिली थी और साल 2006 में उन्हें इस काम की वजह से शांति के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था.

हालांकि समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, शेख हसीना ने उन पर गरीबों का खून चूसने का आरोप लगाया है. साल 2013 में सरकार ने नियत प्रक्रिया का पालन किए बिना कर में छूट पाने, शक्ति का दुरुपयोग और विदेशी यात्रा नियमों का उल्लंघन करने को लेकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया था.(भाषा)