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गुड-बैक्टीरिया से रखे पेट को स्वस्थ

गुड-बैक्टीरिया से रखे पेट को स्वस्थ


हमारे शरीर के अंदर रहने वाले कई प्रकार बैक्टीरिया है, आम भाषा में लोग इसे गुड-बैक्टीरिया भी कहते हैं. इसके कारण ही अक्सर शरीर की छोटी-मोटी बीमारियां अपने आप ही ठीक हो जाती हैं.इसका मतलब जिसके शरीर में जितना गुड-बैक्टीरिया होगा वह उतना स्वस्थ रहेगा,अधिकांश हमारे इंटेस्टाइन यानी आंतों में रहते हैं.सामूहिक रूप से इन्हें पेट के 'माइक्रोबायोटा' से जाना जाता है,विभिन्न खाद्य पदार्थों से युक्त आहार में विविध प्रकार के माइक्रोबायोटा पाए जाते हैं. फल और सब्जियां में  माइक्रोबायोटा के लिए पोषक तत्वों का सबसे अच्छा स्रोत हैं, इसमें हाई फाइबर होता है बिफीडोबैक्टीरिया को शरीर के लिए लाभकारी बैक्टीरिया भी माना जाता है क्योंकि वे आंतों की सूजन को रोकने और आंत के स्वास्थ्य को बढ़ाने में मदद करता है, सेब,आर्टिचोक ब्लूबेरी,बादाम और पिस्ता शरीर में बिफीडोबैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं। दही का सेवन आंतों के बैक्टीरिया के लिए लाभदायक हो सकता है खमीर वाली चीजें यानी फर्मेंटड चीजों में लैक्टोबैसिल्यस नामक बैक्टीरिया होते हैं,जो लोग दही  खाते है उनकी आंतों में अधिक लैक्टोबैसिली होती है इन लोगों में एंटरोबैक्टीरिया भी कम होता है, जो सूजन और कई पुरानी बीमारियों के जुड़ा होता है। अक्सर बाहरी खाने  में आर्टिफिशियल स्वीटनर की मात्रा ज्यादा होती है जो  माइक्रोबायोटा के लिए नुकसानदायक होता है यह वजन बढ़ाने का काम करता है और इससे ब्लड सर्कुलेशन और इंसुलिन को भी नुकसान पहुंचता है।