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आज से शुरू होगा संसद का शीतकालीन सत्र, आर्थिक सुस्ती और नागरिकता विधेयक हंगामे के आसार

आज से शुरू होगा संसद का शीतकालीन सत्र, आर्थिक सुस्ती और नागरिकता विधेयक हंगामे के आसार

नई दिल्ली। आज से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है। जहां एक तरफ सत्ताधारी बीजेपी पिछले सत्र की तरह इस बार भी अपना वर्चस्व बनाए रखने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्षी दलों की कोशिश है कि सरकार को जनता से जुड़े मुद्दों पर घेरा जाए। पिछले सत्र में सरकार ने राज्यसभा में अपना बहुमत न होते हुए भी तीन तलाक और एनआईए की ताकत बढ़ाने वाले बिल को पास करा लिया था।

इस दौरान विपक्षी दल कई ऐसे मुद्दे उठा सकते हैं जिससे शीतकालीन सत्र शुरुआत से ही 'गरम' हो सकता है। सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस की सबसे बड़ी कोशिश राज्यसभा में विपक्षी एकता बनाए रखना है।

हालांकि पिछले बजट सत्र और इस शीतकालीन सत्र में कई राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे रहे, जिन पर सदन में हंगामा होना लगभग तय है। जहां पिछली बार विपक्ष लोकसभा में करारी हार के कारण कुछ दबा हुआ महसूस कर रहा था, वहीं कुछ राज्यों के चुनावी नतीजों ने उसमें फिर से हवा फूंकी है।

हाल के चुनाव में जहां कांग्रेस ने हरियाणा में बीजेपी को करारी टक्कर दी है, वहीं महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बीजेपी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं दिख रही है।

मंदी और अनुच्छेद 370 पर बहस
इस सत्र में विपक्षी दल देश में अर्थिक मोर्चे पर छाई सुस्ती को मुद्दा बना सकता है। साथ ही अनुच्छेद 370 पर भी विपक्ष की तरफ से सरकार को घेरने की तैयारी होगी। सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में पीएम मोदी ने हर मुद्दे पर चर्चा की बात कही है। इस दौरान कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कश्मीर में फारुक अब्दुल्ला जैसे नेताओं को हिरासत में रखने का मुद्दा भी उठाया। विपक्षी दलों का कहना है कि वे आर्थिक सुस्ती और बेरोजगारी के मुद्दे को भी सदन में उठाएंगे।

पहली बार बीजेपी के मुकाबले विपक्षी खेमे में होगी शिवसेना
लंबे समय से बीजेपी की सहयोगी रही शिवसेना भी अब अलगाव के बाद दोनों सदनों में विपक्षी खेमे में बैठेगी। शिवसेना की लोकसभा में 18 और राज्य में 2 सीटें हैं। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में ऊपरी सदन में विपक्ष का बहुमत होने के कारण विधेयकों को पारित कराने में मुश्किल आई थी। अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय ने विवादित स्थल पर राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसने बीजेपी का मनोबल बढ़ाया है।

नागरिकता संशोधन विधेयक पर दिखेगी गर्मजोशी
आपको बता दें कि सरकार ने नागरिकता (संशोधन विधेयक) को इस सत्र में पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया है। इसके तहत पड़ोसी देशों से आए गैरमुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देना है। मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में इस विधेयक को पेश किया था लेकिन विपक्षी दलों के विरोध के चलते इसे पारित नहीं कराया जा सका। विपक्ष ने इस विधेयक की आलोचना करते हुए इसे धार्मिक आधार पर भेदभाव बताया था। विधेयक में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर प्रताड़ित किए जाने के कारण संबंधित देश से पलायन करने वाले हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध एवं पारसी समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है।