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11 वन भैंसा होने का सरकार का दावा वन विभाग ने किया खारिज, राजकीय पशु की मादा प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर,

11 वन भैंसा होने का सरकार का दावा वन विभाग ने किया खारिज, राजकीय पशु की मादा प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर,

चमन प्रकाश केयर

रायपुर. छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु वन भैंसा की गिनती अब तक वन विभाग नहीं कर पाया है। गरियाबंद के उदंती सीतानदी अभ्यारण को छोड़ बस्तर के इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान और पामेड़ वन्यजीव अभ्यारय में वन भैंसा का एक बड़ा झुण्ड होने के बाद गिनती करने की योजना कागजों पर ही सिमटकर रह गयी हैं।

दलील दी जा रही है कि नक्सल प्रभावित एरिया होने के कारण वन विभाग के अधिकारीयों के हाँथ पांव फूल रहे हैं। यही वजह है कि अब तक छत्तीसगढ़ में वन भैंसा की गिनती नहीं की जा सकी हैं। राष्ट्रीय उद्यान इंद्रावती टाइगर रिजर्व में विचरण करने वाले छत्तीसगढ़ के  वन भैंसा पड़ोसी राज्य आँध्रप्रदेश, तेलंगानामहाराष्ट्र के गढ़चिरौली के जंगलो में घूमते रहते हैं।
 
राजकीय पशु वन भैंसा की मादा प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर है जिसे वन विभाग का अमला तरह-तरह के उपाय कर मादा प्रजाति को बढ़ाने का प्रयास करते नज़र आते हैं। बावजूद इसके वन विभाग को अब तक असफलता ही हाथ लगी हैं। यही कारण है कि पिछले कई सालों से राज्य सरकार गरियाबंद के इलाक़े में बाड़े में रखकर वन भैंसों की वंश वृद्धि के लिए लगातार कोशिश करती रही है लेकिन हर बार नर वन भैंसा का जन्म होता रहा है.  

आपको बता दें कि दुनिया भर में 90 फीसदी से अधिक वन भैसों की आबादी भारत के पूर्वोत्तर में बसती हैं, लेकिन मध्य भारत, ख़ासकर छत्तीसगढ़ में वन भैंसों का अस्तित्व ख़तरे में है. वहीं बाघ या हाथी जैसे वन्यजीवों की ही तरह वन भैंसा वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 का जानवर है. इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंज़रवेशन ऑफ़ नेचर ने वन भैंसा को लुप्त प्रजाति की श्रेणी में रखा है.  

सरकार का दावा है कि छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी अभ्यरण में शुद्ध प्रजाति के केवल 11 वन भैंसे बचे हैं, जिनमें केवल दो मादा वन भैंसा हैं. हालांकि राज्य के इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान और पामेड़ वन्यजीव अभ्यारण्य में भी वन भैंसा हैं, लेकिन अब तक इन वन भैंसों को लेकर कोई विस्तृत अध्ययन नहीं हुआ है.

पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ़ अतुल शुक्ल ने बताया कि नक्सल प्रभावित एरिया होने की कारण गिनती नहीं किया गया है. आगे बहुंत जल्द वन भैंसों के सही आकंड़े लगाने के लिए गणना शुरू हो जाएगी।

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