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कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः कुछ दृश्य

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः कुछ दृश्य

एक


नाली का पानी

चलने लगता है सड़कों पर

सड़कों पर चलने वाला 

बह जाता है नाले में

कचरा चलना नहीं जानता

रोक रास्ता पानी का

आपस में रुँध जाता 

डूबने लगता है घरबार


दो


भोर होते ही

सड़क का गहरा गड्ढा

भरा हुआ पानी निथराकर

दर्पण बन जाता 

उसमें दिन भर

प्रतिबिम्ब देख कर

सूरज ढल जाता 

फँस जाता है गड्ढे में

बस का पहिया

अँधियारे में कोई दुपहिया

चलती रहती है सरकार


तीन

Is Media Part of the Problem or Solution in Addressing GBV? | NGO ...

मीडिया बंदर

जैसा चाहे नचा रही

सरकार देश के अंदर

कहीं नहीं शुभ समाचार

अमंगल बीच ढिंढोरा मंगल का

भड़कते दंगल का हल्ला बोल

अपनी आवाज़ दबा कर

करे बेखबर सबको

उठा कर सब की आवाज़

करता सब को खबरदार

सब के बीच रवीश कुमार