मध्यप्रदेश की डायरी: भोपाल ब्यूरो चीफ प्रणव पारे की कलम से (रहा किनारे बैठ) -जाने कितनी उड़ान बाकी है, इस परिंदे में जान बाकी है

मध्यप्रदेश की डायरी: भोपाल ब्यूरो चीफ प्रणव पारे की कलम से (रहा किनारे बैठ) -जाने कितनी उड़ान बाकी है, इस परिंदे में जान बाकी है


मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान बाधा दौड़ में माहिर है, पहले शपथ, फिर सिंधिया जी का भाजपा में स्वागत, उसके बाद मंत्रिमंडल की घोषणा में दिल्ली तक दौड़ लगाना, इसके बाद विभागों का बंटवारा और अब जिलों के प्रभारी मंत्रियों की घोषणा करना है। बहुत सारी बाधाओं के बावजूद उनकी बाधा दौड़ खत्म नहीं हो रही है।

उपचुनावों की माया
कोविड 19 के चलते चुनाव आयोग दो तरफा दबाव में है। संक्रमण से बचाव के लिए इस बार ज्यादा संसाधनों की आवश्यकता पड़ेगी। औसतन एक मतदान केंद्र में जहां चार लोगों की टीम होती थी, अब यह संख्या सात तक जा सकती है। सोशल डिस्टेंसिंग के कारण मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी ठीक वैसे ही जैसे गेहूं की खरीद के समय साढ़े चार हजार से भी ज्यादा खरीदी केंद्र बना कर संक्रमण से बचाव किया था, लेकिन इस बार मास्क, सेनिटाइजर और कर्मचारियों के टॉन्सपोर्टशन में भी खर्च बढ़ेगा।

दूध की रखवाली- बिल्लियों से
भाजपा संगठन उपचुनावों में होने वाली बगावत और भीतरघात पर काबू करने के लिए उन पर नजऱ रखी जा रही है। जो 'सात सफल विधायको की कहानियां बहुत पढ़ रहे है। इसके बाद 'खामोश खिलाडिय़ों पर भी नजऱ है। संगठन इस बार 'बिल्लियों से ही दूध की रखवाली करवाकर मानेगा ऐसा नजऱ आ रहा है। इधर कांग्रेस पार्टी में भी कुछ ऐसा करने का दबाव है जो थोड़ा आउट ऑफ बॉक्स हो, इसके लिए कोंग्रेस की नजऱ भाजपा के असंतुष्ट नेताओं पर है जिनको बागी बना भाजपा के खि़लाफ़ लड़ाया जा सके। इधर भाजपा के कुछ नेता सिंधिया जी के भाजपा में आने के बाद से लगातार असंतुष्ट है और लामबंदी के साथ दिल्ली तक संगठन में अपना पक्ष लगातार रख रहे है। इधर कांग्रेस टिकिट वितरण को लेकर दुविधा में है कि इस बार टिकिट किस को दे, क्योंकि जिनको दिया था वो भाजपा में है। अब भाजपा के ही असंतुष्ट नेता बचते है या भाजपा से हारे हुए कांग्रेसी नेता। छन के आ रही खबरे बता रही है कि इस बार कांग्रेस एकदम युवा और ताजा चेहरा भी मैदान में उतार सकती है जो जीत की संभावनाओं को बढ़ा सकता है।

कर्ज का बोझ
मध्यप्रदेश की वित्तीय हालात ठीक नहीं है। लगातार कर्ज और राजस्व घाटे में बहुत बड़ा अंतर चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने इसके लिए मंत्रीमंडल के साथियों से सुझाव भी मांगे है। इसके अलावा 'आत्मनिर्भर मध्यप्रदेशÓ के लिए उच्चस्तरीय बैठके भी हुई है जिसमे इसके लिए समिति का गठन भी किया गया है जो एक रोडमेप भी जल्द ही पेश करेगी।

माया मिली ना राम
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने रामजन्मभूमि के भूमि पूजन के समय अपने दफ़्तर के बाहर बहुत बड़ा भगवान राम का कटआउट लगाया था। फिर ज़ोरदार ढंग से कमलनाथ जी के घर पर हनुमान चालीसा और भक्ति के कार्यक्रम की धूम मची। फिर अब सुनने में आया है कि भगवान राम का बड़ा सा कटआउट निकाल लिया गया है। अब क्यूं निकाला, किस के कहने या दबाव में निकाला ये खुसुर-फुसुर आजकल भोपाल में चल रही है। बात भी थोड़ी अजीब है क्योंकि कई लोग इसे नोटिस में ले रहे हैं।

अभी और भी झटके बाकी है
मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी के लिये अभी कुछ और झटके है जो शायद बहुत बड़े हो, और चौकाने वाले हो, एक कद्दावर और पुराने खाटी ब्राम्हण नेता को लेकर अफवाहों का बाजार बहुत गर्म है। सूत्र बता रहे है कि आज कल ये नेता भाजपा के साथ संपर्क में है और आने वाले दिनों में कोई बवंडर फिर हो जाये तो आश्चर्य वाली बात नहीं।

चलते चलते
पिछली बार हमने अपनी डायरी में जि़क्र किया था कि कुछ बड़े अफसरो की नवीन पदस्थापना होगी। इसी सिलसिले में श्रम विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉक्टर राजेश राजौरा को गृह और जेल विभाग का जिम्मा सौपा है। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) रहे एसएन मिश्रा को जल संसाधन विभाग सौंपा गया है।  परिवहन उनके पास अतिरिक्त प्रभार में रहेगा। अनुपम राजन से जनसंपर्क विभाग लेकर शिवशेखर शुक्ला को दिया गया है। वाणिज्यिक कर विभाग दीपाली रस्तोगी को दे दिया गया है। दीपाली इस समय एमएसएमई विभाग की प्रमुख सचिव हैं।