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कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः मुझे इनका समर्थन चाहिए

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः मुझे इनका समर्थन चाहिए


जब मेरा जन्म हुआ

समर्थन किया पूरी पृथ्वी ने

मेरे पक्ष में बहने लगी हवाएँ

मार्ग दिखाने के लिए उग आया सूर्य

मेरे जीवन पर छा गया पूरा आकाश

पार उतरने के लिए 

जल ने मेरा समर्थन किया


अब तक जीवित हूँ 

इन्हीं के समर्थन से

छीन रहे हैं लुटेरे और पाखण्डी

मुझसे मेरी पृथ्वी

छीन रहे हैं मेरी आग, मेरा पानी

आ रहा है वह समय

खरीदूँगा साँस लेने के लिए हवा

एक दिन गुम हो जाऊँगा आकाश में


जीते-जी करता हूँ प्रार्थना

जितना जीवन आये मेरे बाद

उसके समर्थन में घूमती रहे पृथ्वी

उसके पक्ष में बहती रहें हवाएँ

उसे मार्ग दिखाता रहे सूर्य

उस पर छाया रहे पूरा आकाश

अपनी नौका लेकर 

जाये जब वह नदी किनारे

उसे पार उतारने के लिए

जल उसका समर्थन करे


अब तक जीवित हूँ 

इन्हीं के समर्थन से

मृत्यु के लिए भी

मुझे इन्हीं का समर्थन चाहिए