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हाथरस मामले से आहत गाजियाबाद के दलित समाज के 236 लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाया

हाथरस मामले से आहत गाजियाबाद के दलित समाज के 236 लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाया

नई दिल्ली।  उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित युवती के साथ बलात्कार और मौत मामले में समाज आहत है।  वहीं गाजियाबाद के 236 दलितों ने हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया है। 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजियाबाद के करहैड़ा गांव के वाल्मीकि समुदाय के 236 लोगों ने डॉ. बीआर आंबेडकर के परपौत्र राजरत्न आंबेडकर की मौजूदगी में बौद्ध अपनाया। 

दलितों के साथ भेदभाव का अनुभव बताते हुए गाजियाबाद में घरेलू सहायिका के तौर पर काम करने वाली सुनीता (45) ने कहा कि जिस घर में वह बतौर घरेलू सहायिका काम करती हैं, जब वहां पीने के लिए एक गिलास पानी मांगा तो दलित होने की वजह से उन्हें स्टील के गिलास में पानी दिया गया। 

2009 में सुनीता के बड़े बेटे पवन ने गाजियाबाद के एक लग्जरी अपार्टमेंट में चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन दिया था. पवन का कहना है कि वाल्मीकि सरनेम होने के चलते उन्हें सिर्फ साफ-सफाई का काम दिया गया.

यह सुनिश्चित करने के लिए उनके दोनों बच्चों को इस तरह के भेदभाव का सामना नहीं करना पड़े, पवन ने अपने परिवार के सदस्यों और कई पड़ोसियों के साथ 14 अक्टूबर को बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया.बौद्ध धर्म स्वीकार करने वालों में पूर्वी दिल्ली के शाहदरा में मैकेनिक के तौर पर काम कर चुके इंदर राम (65) भी शामिल है।  

उन्होंने कहा,  ‘हाथरस में 19 साल की दलित युवती के साथ जो हुआ, उसके बाद हमने धर्म परिवर्तन का फैसला किया. बौद्ध धर्म में कोई जाति नहीं है. वहां कोई ठाकुर या वाल्मीकि नहीं है. हर कोई सिर्फ इंसान है, सभी सिर्फ बौद्ध हैं.’

पवन कहते हैं, ‘हमने पहले भी धर्म परिवर्तन पर विचार किया था लेकिन हाथरस की घटना ने हमें हिला दिया. जिस तरह से राज्य सरकार पीड़िता के परिवार के साथ व्यवहार कर रहा है और जिस तरह से पीड़िता के शव को उसके परिवार की मंजूरी के बिना रात 2.30 बजे जला दिया गया, हम उससे हिल गए हैं.’

उन्होंने कहा कि करहैड़ा गांव के लोगों ने पीड़िता की मौत के कुछ दिनों बाद कैंडल मार्च किया था और इसके बाद हमने बौद्ध धर्म स्वीकार करने को लेकर सोचना शुरू किया.

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस ज़िले में 14 सितंबर को सवर्ण जाति के चार युवकों ने 19 साल की दलित युवती के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट करने के साथ कथित बलात्कार किया था.अलीगढ़ के एक अस्पताल में इलाज के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 29 सितंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया था.

इसके बाद परिजनों ने पुलिस पर उनकी सहमति के बिना आननफानन में युवती का अंतिम संस्कार करने का आरोप लगाया, जिससे पुलिस ने इनकार किया था.युवती के भाई की शिकायत के आधार पर चार आरोपियों- संदीप (20), उसके चाचा रवि (35) और दोस्त लवकुश (23) तथा रामू (26) को गिरफ्तार किया है.राज्य सरकार द्वारा एसआईटी गठित किए जाने के बाद अब सीबीआई द्वारा इस मामले की जांच की जा रही है.