कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः कैसे गाऊँ व्यथा-प्रसंग

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः कैसे गाऊँ व्यथा-प्रसंग


नयनों से चुपचाप

बह आता 

सूख रहा मुख पर

यह नीर-अधीर


सूने मन में

प्यास अकेली

हृदय-क्षीण तीर


झर-झर कल-कल

छल-छल जल में

अकाल रसभंग


कैसे बचाऊँ

आँखों का पानी

गगन से मिलाऊँ

कैसे उसकी बानी

कैसे गाऊँ

किसे सुनाऊँ

धीरज के तट पर

व्यथा-प्रसंग

खो गयी जल-तरंग