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एक और सूपेबेड़ा : क्वालिटी कास्टिंग आयरन फैक्ट्री के प्रदूषित पानी से सैकड़ों को किडनी व त्वचा रोग, विधानसभा से सटे भुरकोनी गांव की कास्टिंग आयरन फैक्ट्री की दादागिरी, मजदूर तक दूसरे गांव से लाए

एक और सूपेबेड़ा : क्वालिटी कास्टिंग आयरन फैक्ट्री के प्रदूषित पानी से सैकड़ों को किडनी व त्वचा रोग, विधानसभा से सटे भुरकोनी गांव की कास्टिंग आयरन फैक्ट्री की दादागिरी, मजदूर तक दूसरे गांव से लाए

चमन प्रकाश केयर


रायपुर. विधानसभा से लगे भुरकोनी गांव में दो साल पहले संचालित किये जा रहे क्वालिटी कास्टिंग आयरन फैक्ट्री को बंद किये दो साल हो गए हैं लेकिन इस फैक्ट्री के द्वारा छोड़े गए तेज़ाब केमिकल और दूषित पानी से कई ग्रामीणों की किडनी खराब हो रही है तो कई ग्रामीणों को त्वचा रोग हो रहा है. डेढ़ से ज्यादा ग्रामीण इस बीमारी की चपेट में है. दूसरी ओर इससे जुड़े विभाग कोई कार्यवाही करने की बजाय आंखें मूदें बैठे हुए हैं

इस संवाददाता ने जब गांव का दौरा किया तो स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि क्वालिटी कास्टिंग आयरन फैक्ट्री के मालिक पंकज अग्रवाल हैं जिन्हें कई बार इस संबंध में बतलाया गया मगर उनके कानों में जूं तक नही रेंगती. इस उद्योग में कभी चूड़ीदार छड़ बनाया जाता था जिसे तेज़ाब की टंकी में डुबोकर जंग निकाला जाता था। कवालिटी कास्टिंग फैक्ट्री से निकले छड़ को दुबई देशों में करोड़ों रूपये में सप्लाई किया जाता था।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि फैक्ट्री से निकलने वाले दूषित पानी को जमीन के अंदर एक सोख्ता बनाकर छोड़ा जाता था। इससे आसपास के हैंडपंप, बोरवेल और कुंआ में अभी भी तेज़ाबयुक्त पानी निकल रहा है जिससे ग्रामीणों का स्वास्थ्य आये दिन ख़राब हो रहा है तो वहीं कई ग्रामीणों की किडनी भी ख़राब हो गयी है।

पीड़ितों के मुताबिक क्वालिटी कास्टिंग आयरन फैक्ट्री से निकला हुआ प्रदूषित पानी का असर इतना भयावह है कि कई ग्रामीणों ने अपने बोरवेल और कुंआ का पानी उपयोग करना बंद कर दिया है. विजय वर्मा नामक एक ग्रामीण ने अपने बोरवेल से निकलने वाले दूषित पानी की जाँच एक लैब में करवायी है जिसमें बड़ी मात्रा में एसिड पाया गया है. हालाांकि जब उनसे रिपोर्ट मांगा गया तो वे यह रिपौर्ट नही दे सके.

भुरकोनी के ग्रामीणों ने बताया कि जब क्वालिटी कास्टिंगआयरन फैक्ट्री में गांव के लोग मजदूरी करने जाया करते थे तब उनकी अँगुलियों में फोड़े होने के साथ-साथ गलने भी लगी थी. जिसके बाद पीड़ित ग्रामीण ने फैक्ट्री में मजदूरी करना बंद कर दी थी. इसके बाद फैक्ट्री मालिक पंकज अग्रवाल ने गांव में विरोध होता देख बाहर से मजदूर बुलाकर काम करवाय. फैक्ट्री संचालक के खिलाफ अभी भी ग्रामीणों में जमकर आक्रोश देखा जा सकता है।
 

बोरवेल से लेकर हवा तक प्रदूषित
तात्कालिक एसडीएम बीएल गजपाल के साथ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, उद्योग, प्रदूषण विभाग के अफसर और विधानसभा थाने की टीम भी गई थी। एसडीएम की जाँच में पता चला था कि भुरकोनी में क्वालिटी कास्टिंग आयरन में पुराने लोहे की छड़ों में लगे जंग को एसिड और केमिकल से साफ किया जाता है। उसी पानी को वहीं जमीन पर ही बहाया जा रहा था। वही रिसता हुआ पानी गांव के कई जगहों पर पहुंच रहा था। साफ नजर आ रहा था उससे बीमारी फैलने का खतरा है।

जिन लोगों के घरों में बोर थे, उनमें भी प्रदूषित पानी आने लगा था। फैक्ट्री के बोरवेल का पानी भी प्रदूषित हो गया है। इस वजह से लोगों ने घरों और मजदूरों ने फैक्ट्री का पानी पीना छोड़ दिया था। इससे लोगों को बीमारियां हो रही थी। इसके बाद अफसरों ने मौके पर ही फैक्ट्री से कई नमूने भी ले लिए, उसके बाद फैक्ट्री को बंद कर दिया गया है।

कलेक्टर के जनदर्शन में शिकायत हुई, जांच के बाद फैक्ट्री सील हो गई

गौरतलब है कि प्रदूषित पानी फैलाने फैक्ट्री के खिलाफ गांव के लोगों ने पूर्व में जनदर्शन में कलेक्टर से शिकायत की थी फैक्ट्री से निकलने वाली प्रदूषित पानी तालाब और दूसरी जगहों पर में पहुंच रही है। इस वजह से गांव के लोगों को कई तरह की बीमारियां हो रही है। इसके बाद कलेक्टर ने एसडीएम को टीम के साथ फैक्ट्रियों की जांच करने को कहा था। जांच में शिकायत सही पाई गयी, इसके बाद फैक्ट्री को सील कर दिया गया।