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राहुल जी क्या हुआ आपको

राहुल जी क्या हुआ आपको

ध्रुव शुक्ल

27 नवंबर 2020 को देश में ढलती शाम की धुंधली होती जाती रोशनी में 'आज तक' टीवी चैनल पर किसान आंदोलन को लेकर आपका बयान जिन शब्दों में अंकित था, उन्हें यहाँ फिर से लिख रहा हूँ ...

आपने कहा कि ... पी. एम को याद रखना चाहिए था कि जब अहंकार सच्चाई से टकराता है, पराजित होता है। सच्चाई की लड़ाई लड़ रहे किसानों को दुनिया की कोई सरकार रोक नहीं सकती। नहीं हुआ है अभी सवेरा, पूरब की लाली पहचान। चिड़ियों के जगने से पहले खाट छोड़ उठ गया किसान। काले कानूनों के बादल गरज रहे हैं गड़-गड़, अन्याय की बिजली चमक रही चम-चम, मूसलाधार पानी बरसता, जरा न रुकता लेता दम, मोदी सरकार के खिलाफ।

आपके बयान की व्याख्या करने का आपसे निवेदन करूँ तो शायद आपके पास समय न होगा। अगर आप किसानों पर इस्तेमाल किए जा रहे वाटर कैनन की  'फुहारों'  की तुक 'सरकारों' से मिलाने वाले सुरजेवाला को निर्देशित करके अपने इस बयान का मतलब समझाने में मेरी मदद कर सकें तो मेरी चिंता दूर हो कि आपका दल अभी भी देश में राजनीतिक विकल्प के रूप में मौज़ूद है।

राहुल जी, हम भारत के लोगों को यह तो पता चलना ही चाहिए कि आप देश के किसानों से क्या कहना चाहते हैं। आपका बयान इतना अमूर्त ( Abstract ) है कि देश के साधारण लोग उसे कैसे समझ पायेंगे। मैं थोड़ा-सा पढ़ा-लिखा हिन्दी का लेखक आपके बयान को समझना चाहता हूँ। मैंने आपकी दादी के पिता की किताबें पढ़ीं  हैं और उन्हें पढ़कर मुझे काफी हद तक हिंदुस्तान की कहानी समझ आयी है। पता नहीं, आप मेरे बारे में क्या सोचेंगे कि मुझे आपके चार-छह वाक्य समझ नहीं आ रहे।