breaking news New

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की विशेष टिप्पणी : आत्मनिर्भरता का नया दौर

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की विशेष टिप्पणी : आत्मनिर्भरता का नया दौर

आत्मनिर्भरता का नया दौर

सुभाष मिश्र

    हमारे यहां एक कहावत है : सूपा बोले तो बोले अब चलनी भी बोलने लगी है। आत्मनिर्भर भारत के इस दौर में चीन, पाकिस्तान के बाद अब नेपाल जैसा देश भी हमें आंख दिखा रहा है। कहां गया नेपाल का भाईचारा। कभी पूर्ण हिन्दूवादी देश रहे नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर और काठमांडू को देखकर हमें भ्रम होता रहता था कि कहीं हम अपने ही देश में तो नहीं है ।कोरोना काल में आई आपदा को अवसर में बदलकर हमने आत्मनिर्भरता हासिल की। आज मोदी सरकार की दूसरी पारी का एक साल बीता। ये साल सही मायने में बहुत ऐतिहासिक रहा। भाजपा की सदस्य संख्या 11 करोड़ से बढ़कर 18 करोड़ हो गई। कोरोना के मरीजों की संख्या में सर्वाधिक वृद्धि भी अभी ही दर्ज की गई है ।दिन—प्रतिदिन बढ़ते कोरोना के आंकड़े में हमने आज एक लाख 74 हजार पार कर लिया। अब तक 7664 मौते हुई हैं जिसमें से अकेले आज 265 मौतें दर्ज की गई हैं। 

     इस बीच में हमने देश में टेस्टिंग की सुविधा बढ़ाई है। देश में दो लाख 'बेड की व्यवस्था है। देश के लोगों को, जो आत्मनिर्भर नहीं बन पाये हैं, उनके लिए वेंटिलेटर की संख्या भी बढ़ाई है। यह आत्मनिर्भरता का नया दौर है। 12 करोड़ लोग नौकरी गंवाने के बाद भी आत्मनिर्भर हैं। मजदूर मोटरगाड़ी के होते हुए भी अपने पैरों पर चलकर आत्मनिर्भर है। छोटे-बड़े सभी व्यापारी, उद्योग, न्यूनतम उत्पादन और न्यूनतम स्टॉफ के साथ आत्मनिर्भर हैं। सड़कों पर बैलों की जगह खुद जुतकर इस देश का गरीब किसान आत्मनिर्भर है। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 खत्म होने के बाद, वहां के लोग आत्मनिर्भर हैं। सुप्रीम कोर्ट से मुकदमेबाजी खत्म होने से अयोध्या में रामलल्ला का मंदिर बन जाने से भगवान राम के भक्त आत्म निर्भर हैं ।तीन तलाक का कानून बन जाने से मुस्लिम महिलाएं आत्म निर्भर हो गई  हैं। मोदी सरकार का आत्मविश्वास और भयमुक्त वातावरण देखकर गौरक्षक आत्मनिर्भर हैं। अल्पसंख्यक समुदाय की नागरिकता को देश में पक्का  और पंजीबद्ध करने के लिए किये जा रहे रजिस्ट्रेशन से अल्पसंख्यक समुदाय आत्मनिर्भर होने जा रहा है। सरकार की एक साल की उपलब्धियों का बखान करते हुए मंत्रीगण बता रहे हैं कि हम पीपीई किट बनाने में आत्मनिर्भर हो गए हैं। हम मास्क, सेनेटाइजर बनाने में आत्मनिर्भर हो गए हैं। हमने जनधन खातों में पांच-पांच सौ रूपये जमा करवाकर, करोड़ों लोगों को आत्मनिर्भर बना दिया है। 

    आपदा प्रबंधन में किये गये छोटे-मोटे उपायों को उपलब्धि बताकर जिस आत्मनिर्भर भारत का गाना गाया जा रहा है, यह उसी तरह है जैसे तालाबंदी के समय ताली बजाना, थाली बजाना और दीया जलवाना। पूरे देश के प्रवासी मजदूरों की दुर्गति और तमाम आर्थिक, प्रशासनिक मुद्दों पर असफल होकर यह कहना कि हमारी दूरदृष्टि के कारण कोरोना का संक्रमण उस तेजी से नहीं बढ़ा, जो बढ़ सकता था। हमने देशहित में कड़े फैसले लिए। हमने लोगों को बताया कि यदि तुम्हें देश में रहना है तो पैदल चलना होगा, ट्रेन में भूखों मरना होगा। पानी जैसे बुनियादी देश के लिए खराब और सड़ा खाना, खाना होगा। हमारे देश के कानून मंत्री कह रहे हैं कि परमाणु हथियार को लेकर जब देश के प्रधानमंत्री निर्णय ले सकते हैं तो निष्पक्ष न्याय को लेकर उन पर क्यों नहीं भरोसा किया जा सकता! सही कह रहे हैं कानून मंत्री! जैसे, अमेरिका के प्रेसीडेंट ट्रम्प कह रहे हैं कि मोदी जी ने उन्हें चीन से अपनी नाराजगी बताई। कानून मंत्री अच्छे से जानते हैं कि परमाणु हथियार कभी नहीं चलायेंगे पर अपनी आत्मनिर्भरता के लिए न्यायालयों का उपयोग जरूर किया जायेगा । सभी जगह आत्मनिर्भरता का विस्तार किया जायेगा ।

    ‏देश के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश सेवानिवृत्ति के तत्काल बाद राज्यसभा के सदस्य बन जायें तो लोग समझ जाते हैं कि यह आत्मनिर्भरता की ओर  मजबूत कदम है। अब जबकि लॉकडाउन—5 के लिए केन्द्र सरकार की गाईड लाईन जारी हो चुकी है तो हम समझ सकते हैं कि आत्मनिर्भरता के लिए हम कोरोना के बढ़ऩे का इंतजार कर रहे थे। अब एक राज्य से दूसरे राज्य आने-जाने के लिए पास नहीं लेना होगा। होटल, औद्योगिक संस्थान खुले जायेंगे। यह निर्णय तब लिया गया जबकि कोरोना वायरस का अर्थव्यवस्था और लोगों की जीविका पर भयावह प्रभाव दिखना शुरू हो चुका है। बीते 24 मार्च से जारी लॉकडाउन के चलते देश में बेरोजगारी की दर में भारी उछाला आया है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) ने देश में बेरोजगारी पर एक सर्वे रिपोर्ट जारी की है, जिसके मुताबिक तीन मई को समाप्त हुए सप्ताह में देश में बेरोजगारी दर बढ़कर 27.1 फीसदी पर पहुंच गई है। इससे पहले जारी सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2020 में देश में बेरोजगारी दर बढ़कर 23.5 फीसदी पर पहुंच गई थी। सिर्फ अप्रैल महीने में बेरोजगारी दर में 14.8 फीसदी का इजाफा हुआ था। मार्च महीने के मुकाबले अप्रैल में बेरोजगारी दर में तेज बढ़ोतरी हुई थी।

    ‏लॉकडाउन के बीच पिछले 8 हफ्तों में बेरोजगारी की औसत दर 24.2 फीसदी रही है। 25 मई तक देश में औसत बेरोजगारी दर 24.5 फीसदी रही। इस दौरान शहरी बेरोजगारी दर 26.3 फीसदी और ग्रामीण बेरोजगारी दर 23.7 फीसदी रही। सीएमआईई के अनुसार पूरे मई महीने के दौरान ग्रामीण बेरोजगारी के मुकाबले शहरी बेरोजगारी दर ज्यादा देखी गई। आत्मनिर्भरता के इस दौर में लोग कोरोना के साथ जीना सीख लेंगे। आत्मनिर्भर लोगों को देखकर कोरोना खुद दूर से 'नमस्ते ट्रम्प' की तरह हेलो करके चला जाएगा। भविष्य को लेकर हमारी अनिश्चितता खत्म हो जाएगी। टिड्डी दलों का क्या है, वे भी हमारी आत्मनिर्भरता देखकर दाएं—बाएं हो जाएगा। हमारी विकास दर जीडीपी जो आज सबसे कम 42 फीसदी है, वह भी हमारी आत्मनिर्भरता की प्रवृत्ति को देखकर स्वमेव बढ़ जाएगी। हम अपनी आत्मनिर्भरता को बनाये रखने के लिए 8 जून से मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे, गिरजा में जाकर सामूहिक प्रार्थना कर सकेंगे। हमारे ईश्वर दयालु हैं। हम 33 करोड़ देवी-देवताओं वाले देश के निवासी हैं, कोई न कोई देवता आकर हमारी मदद करेंगे। मोदीजी के शब्दों में कहूं तो हम 130 करोड़ भारतीयों का वर्तमान और भविष्य कोई आपदा या कोई विपत्ति तय नहीं कर सकती। हम अपना वर्तमान भी खुद तय करेंगे और अपना भविष्य भी। हम आगे बढ़ेंगे, हम प्रगति पथ पर दौड़ेंगे, हम विजयी होंगे।

    ‏दोस्तों, हमें अपने देश के प्रधानमंत्री की 'मन की बात' को समझना चाहिए. इस आपदा को हमारी ये आत्मनिर्भरता हमें किसी वेंटिलेटर, किसी अस्पताल, किसी वैक्सीन का मोहताज नहीं होने देगी। हम खुद ही निपट लेंगे इस छोटी-मोटी आपदा से।

    ( लेखक दैनिक आज की जनधारा तथा वेब मीडिया हाउस के प्रधान संपादक हैं )