PSC चेयरमैन ने सरकार को गुमराह किया...नियम विरूद्ध स्टेनो को बनाना चाहते हैं सहायक संचालक कृषि लेखा स्थापना, दो आइएएसों ने जताई आपत्ति

PSC चेयरमैन ने सरकार को गुमराह किया...नियम विरूद्ध स्टेनो को बनाना चाहते हैं सहायक संचालक कृषि लेखा स्थापना, दो आइएएसों ने जताई आपत्ति

जनधारा समाचार
रायपुर. कृषि विभाग के दो आइएएसों के सुझाव को धता बताते हुए पीएससी चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, अपने एक चेहेते स्टेनो गोविंद गिलहरे को सहायक संचालक कृषि लेखा स्थापना बनाना चाहते हैं. इसके लिए सारे नियम कानूनों को ताक पर रखकर डीपीसी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और जल्द ही आदेश जारी हो सकता है. मामले का खुलासा होते ही लिपिक संघ विरोध पर उतारू हो गया है.

सूत्रों के मुताबिक पीएससी चेयरमैन, पूर्व आइएएस टामन सिंह सोनवानी रिटायरमेंट के पहले कई विभागों में काम कर चुके हैं. इस दौरान उनके साथ गोविंद गिलहरे नामक स्टेनो भी कार्य करता रहा लेकिन सोनवानी जैसे ही पीएससी के चयरमैन बने, वे गिलहरे को सहायक संचालक कृषि लेखा स्थापना बनाने की मुहिम में लग गए. जबकि गिलहरे इसके पात्र ही नही हैं. वे कृषि संचालनालय में स्टेनो के पद पर हैं. उन्हें पहले अधीक्षक बनना होगा और उसके बाद ही सहायक संचालक कृषि लेखा स्थापना बन सकते हैं, वो भी विभागीय प्रक्रिया से. इसके लिए पूरे प्रदेश में एक हजार से ज्यादा लोग इस पद के दावेदार हैं.

वैसे भी यह पद विभागीय है लेकिन सोनवानी वित्त विभाग का बताकर इसे विभागीय प्रक्रिया से भरना चाहते हैं. उन्होंने भर्ती नियमों में संशोधन करवाते हुए गिलहरे की फाइल चलवा दी लेकिन कृषि उत्पाद आयुक्त, आइएएस एम.गीता तथा संचालक कृषि आइएएस नीलेश कुमार क्षीरसागर ने प्रक्रिया को अवैधानिक बताते हुए नोटशीट पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया तथा जांच के आदेश दे दिए. अचानक ये दोनों अफसर कोरोना संक्रमण के चलते क्वारंटाइन हो गए हैं. इसी का फायदा उठाते हुए पीएससी चेयरमैन ने ए बी आसना को अपर संचालक कृषि बनाते हुए डीपीसी करवा ली जोकि गलत है.

पसंदीदा कर्मचारी को पदोन्नति दिलाने गलत प्रक्रिया से पद बढ़ा लिए!
नियमों के मुताबिक गिलहरे स्टेनो हैं जबकि सहायक संचालक कृषि लेखा स्थापना के कुल चार पद स्वीकृत हैं जो 50 प्रतिशत सीधी भर्ती से तथा 50 प्रतिशत पदोन्नति से भरे जाने हैं लेकिन सोनवानी जैसे ही पीएससी के अध्यक्ष बने, उन्होंने इस पद में दो पद वित्त विभाग के से जुड़वा दिए और सरकार को 6 पद दिखाते हुए गुमराह कर जैसे तैसे भर्ती नियमों में संशोधन कराया और डीपीसी करवा ली. जबकि विभाग के चारों पद विभागीय प्रक्रिया से भरे जाने हैं जिसके लिए एक हजार से ज्यादा कर्मचारी दावेदार हैं.

कृषि उत्पाद आयुक्त और संचालक कृषि भी विरोध में!

आइएएस एम.गीता का कहना है कि विभागीय सर्कुलर का परीक्षण कराने के बाद ही पदोन्नति की परीक्षा पूरी होगी. नियमानुसार ही विभागीय पदोन्नति पात्र कर्मचारी को दी जाएगी. जबकि कृषि विभाग के संचालक नीलेश क्षीरसागर का कहना है कि पहले सेटअप में स्वीकृत पदों का परीक्षण किया जायेगा. इसके बाद ही पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी कर पीएससी के लिए अनुशंसित की जाएगी. लिपिक संघ ने भी जीएडी कृषि को ज्ञापन देकर मांग की है कि तथ्यों का परीक्षण कराये बगैर पूरी प्रक्रिया हो रही है, जिसका विरोध किया जायेगा.