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भारत का 50वां अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह गोवा में

भारत का 50वां अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह गोवा में

अजित राय

गोवा, 20 नवंबर। भारत का 50 वां अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह गोवा की राजधानी पणजी में बुधवार 20 नवंबर से शुरू हो रहा है। यह समारोह 28 नवंबर तक चलेगा। 1952 में शुरू हुए  भारत के अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह का यह स्वर्ण जयंती संस्करण है। इस बार विभिन्न खंडों में देश विदेश ( 76 देशों) की लगभग 250 फिल्में दिखाई जाएंगी।

एक ओर जहां इस बार दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (2018) से सम्मानित सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की फिल्मों का विशेष पुनरावलोकन है तो दक्षिण भारत के सुपर स्टार रजनीकांत को आईकान आफ गोल्डन जुबली आफ इफी सम्मान से नवाजा जाएगा। अमिताभ बच्चन की कुछ नई पुरानी फिल्मों का पैकेज है जिसमें बदला, ब्लैक, पा, पीकू, दीवार और शोले दिखाई जा रही है।लाइफ़ टाइम अचीवमेंट अवार्ड के लिए चुनी गई सुप्रसिद्ध फ्रेंच अभिनेत्री इजाबेल हपर्ट की फिल्मों का विशेष पैकेज है। रूस को फोकस कंट्री का विशेष दर्जा दिया गया है जबकि फोकस फिल्मकार के रूप में जापान के तकाशी मीके की फिल्में दिखाई जा रही है तो ब्रिटेन के सुप्रसिद्ध वामपंथी फिल्मकार केन लोच की फिल्मों का पुनरावलोकन किया जा रहा है। 

श्रद्धांजलि खंड में फ्रांस की एनेस वार्दा और इटली के बर्नार्डो बर्तोलुची की मशहूर फिल्में दिखाई जा रही है। इस खंड में उन फिल्मी हस्तियों को श्रद्धांजलि दी जाती है जिनका निधन पिछले एक साल के दौरान हुआ है। भारत के मृणाल सेन (भुवन शोम), खय्याम (उमराव जान), राजकुमार बडज़ात्या (हम आपके हैं कौन), गिरीश कर्नाड, विद्या सिन्हा (रजनीगंधा), वीरू देवगन, (फूल और कांटे), कादर खान (हम), बीजू फूकन, एम जे राधाकृष्णन, विजया मूले, रूमा गुहा ठाकुरता तथा राम मोहन को उनकी सबसे चर्चित फिल्मों के प्रर्दशन के साथ श्रद्धांजलि दी जा रही है। फेस्टिवल क्लाईडोस्कोप गोवा फिल्मोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण खंड बन गया है जिसमें दुनिया के प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों-कान, बर्लिन, वेनिस, सनडांस, बुशान, टोरंटो आदि में पुरस्कृत फिल्में दिखाई जाती है। 

सिनेमा के जो दीवाने दुनिया भर के फिल्म समारोहों में नहीं जा पाते उन्हें गोवा में वहां की चर्चित फिल्में देखने का मौका मिल जाता है। इस खंड में दक्षिण कोरिया के बोंग जून हो की कान फिल्म समारोह में बेस्ट फिल्म का पाम डि ओर पुरस्कार जीतने वाली फिल्म पैरासाइट, सेलिन सियामा की  पोट्रेट आफ अ लेडी आन फायर,  जेसिका हाउजनर की लिटिल जो आदि प्रमुख हैं। इसी तरह मास्टर फ्रेम खंड में जर्मनी के फतेह अकीन की द गोल्डन ग्लव, स्पेन के पेद्रो अलमोदवार की पेन एंड ग्लोरी, कनाड के जेवियर दोलान की मैथीज एंड मैक्सीमी, फिलीपींस के लव डायज की द हाल्ट, पिछले साल कान फिल्म समारोह में बेस्ट फिल्म का पुरस्कार जीतने वाले जापान के हिरोकाजू कोरे ईडा की द ट्रूथ, फ्रांस के ओलिवर असाया की वास्प नेटवर्क, बेल्जियम के ज्यां पियरे डार्डेंन और लुक डार्डेंन की इस्लामिक आतंकवाद पर यंग अहमद आदि फि़ल्में प्रमुख हैं। पहले से जारी पुरस्कारों के अलावा दो तीन पुरस्कार पिछले कुछ सालों में जोड़ें गए हैं जिनमें निर्देशक की पहली फिल्म को दिया जाने वाला सेंटेनरी अवार्ड काफी लोकप्रिय हो रहा है। इसी तरह आईसीएफटी यूनेस्को गांधी मेडल उन फिल्मों को दिया जाता है जो सद्भावना और सह अस्तित्व की वकालत करती है। भारतीय पैनोरमा में इस बार कुल  26 फीचर फिल्में चुनी गई है जिसमें सबसे अधिक हिंदी की फिल्में हैं। इसमें भी चार फिल्में मुख्य धारा हिंदी सिनेमा की है, जैसे, बधाई हो, गुली ब्वाय, सुपर 30 और उड़ी- द सर्जिकल स्ट्राइक। इसके अलावा मशहूर फिल्मकार प्रकाश झा की नई फिल्म परीक्षा और संजय पूरण सिंह चौहान की बहत्तर हूरें भी भारतीय पैनोरमा में हैं।

द गोल्डन लाइनिंग में पचास साल पूरे करने वाली फिल्मों, अराधना और सत्यकाम को भी दिखाया जा रहा है। न्यू वेव भारतीय सिनेमा खंड में हिंदी में श्याम बेनेगल की अंकुर और भूमिका , मणि कौल की  दुविधा और उसकी रोटी, कुमार शहाणी की तरंग, मृणाल सेन की भुवन शोम के साथ साथ अडूर गोपालकृष्णन, अरविंदन और ऋत्विक घटक की फिल्में चुनी गई है। दूसरे खंडों में लगे रहो मुन्नाभाई, एम एस धोनी और चेन्नई एक्सप्रेस जैसी पापुलर हिंदी फिल्मों को भी जगह दी गई है।