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मैट्स यूनिवर्सिटी में तर्ज़- ए- टेल 2020 कार्यक्रम संपन्न

मैट्स यूनिवर्सिटी में तर्ज़- ए- टेल 2020 कार्यक्रम संपन्न

रायपुर, 24 नवंबर। मैट्स विश्वविद्यालय, रायपुर में पढ़ने वाले अंग्रेज़ी विभाग के साहित्यिक क्लब - 'यूनिवर्सिटी विट्स ' के छात्रों ने  'तर्ज़- ए- टेल 2020' नामक एक  राष्ट्रीय स्तर  की  कविता वाचन प्रतियोगिता का आयोजन किया। इस प्रतियोगिता को हिंदी, अंग्रेज़ी और उर्दू भाषा में आयोजित किया गया। क्लब के सभी सदस्य- पायल मनवानी, निकिता शुक्ला, सत्यसिद्धा मिश्रा, पी. प्रीति एवं तुहिना सरकार ने विभागाध्यक्ष श्री सौरभ शुक्ला एवं अंग्रेजी  विभाग के अन्य  प्राध्यापकगण डॉ रंजना दास, डॉ संतोष कुमार, दर्शिका चौधरी एवं सीतल बेरा  के दिशा निर्देश में इस प्रतियोगिता का जोरों शोरों से प्रचार किया। प्रतियोगिता में निर्णायक के रूप में वरिष्ठ उप संपादक, सेंट्रल क्रॉनिकल - सुशील अग्रवाल एवं  विशिष्ट अतिथि के रूप में उपकुलपति डॉ. दीपिका ढांड ने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया।

 इस अवसर को कुलाधिपति गजराज पगारिया, महानिदेशक प्रियेश पगारिया, कुलसचिव गोकुलानंदा पंडा, सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थी गण की उपस्थिति में संपन्न किया गया।


तर्ज़- ए - टेल के पंजीकरण में समस्त विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए प्रवेश नि:शुल्क रखा गया जिससे छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि ओडिशा, कर्नाटक, हरियाणा आदि जैसे विभिन्न राज्यों के छात्र शामिल थे और हमारे देश के कई प्रतिष्ठित संस्थान जैसे दीन बंधु छोटू राम यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेकनोलॉजी और क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, बंगलौर के अलावा अन्य कई संस्थानों से कुल 25 युवा कवियों ने बड़े उत्साह से हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने अलग - अलग कविताओं के साथ विभिन्न विषयों पर उन बातों को लफ़्ज़ों में पिरोए  जिससे हम सभी लॉकडाउन के उपरांत अपने अंदर दबाए बैठे थे, जैसे मानसिक स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, प्रेरक, इत्यादि। सभी प्रतिभागियों ने बड़ी खूबसूरती और अलग अंदाज में कविताएं प्रस्तुत की। इस प्रतियगिता को केवल दो सरल नियम से बंधा गया - समय सीमा 5 मिनट, और किसी भी राजनीतिक और अभद्र भाषा की कविताओं का प्रस्तुतिकरण निषिद्ध था।

अंग्रेज़ी कविता वाचन में संजीवनी पांडेय एवं रूपाली बराल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं दूसरे और तीसरे स्थान पर इशीता श्रीवास्तव एवं ममलेश्वरम चन्द्र और महक अली खरे उतरे।

हिंदी कविता वाचन की विजेता सुमन बिस्वास ने अपनी खुद की लिखी गई कुछ पंक्तियां सुनाई-  "जीते जी वो सक्ष ना जाने कितनी मौतें हर रोज़ मरा होगा, फिर थक हार इंतजार को अपने कुछ इस तरह विराम दिया होगा" , जिसने विष्व भर में बढ़ते आत्महत्या कि चिंताओं के ऊपर सबको सजग कर प्रथम स्थान प्राप्त किया| वहीं प्रिया जोशी और  साक्षी दास ने  एक दूसरे को कड़ी टक्कर देते हुए, एक साथ ही द्वितीय स्थान पर खरे उतरे।

इसी प्रकार अंग्रेज़ी और उर्दू भाषा में भी बड़ी ही अदभूत कविताऐं प्रस्तुत की गई।

शीफा अहमद एवं तौफीक़ अहमद रिज़वी ने बड़े ही अनोखे और खूबसूरत अंदाज में स्वयं द्वारा लिखी गई उर्दू कविता का वाचन किया तथा प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त किया|