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8 हजार रुपए देकर ग्रामीणों ने शिकारियों को बुलाया, पांच बंदरों को एयरगन से मार डाला

8 हजार रुपए देकर ग्रामीणों ने शिकारियों को बुलाया, पांच बंदरों को एयरगन से मार डाला


राजनांदगांव।
जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर ग्राम रेंगाकठेरा (बखत) में शिकारियों ने एयरगन से शूट कर पांच बंदर को मार डाला। यह घटना रविवार की शाम की है। घटना के बाद बंदरों का शव बोरियों में भरकर ले गए। सोमवार को भी जब शिकारी गांव पहुंचे तब यहां के कुछ ग्रामीणों ने इसकी शिकायत थाने और वन विभाग में की। मामले की शिकायत के बाद सोमवार दोपहर पुलिस और वन विभाग की टीम गांव पहुंची। विभाग की टीम जांच में जुट गई है। ग्राम प्रमुखों और शिकायतकर्ताओं के बयान लिए गए। इसके लिए गांव में प्रत्येक घर से 100-100 रुपए चंदा कर कुल 8 हजार रुपए इन शिकारियों को दिए गए थे। रेंगाकठेरा ग्राम समिति द्वारा गांव में उत्पात मचा रहे बंदरों को भगाने के लिए तीन शिकारियों को पास के ही गांव सलटिकरी से बुलाया गया था। लेकिन इन शिकारियों ने बंदरों को भगाने की बजाए उन्हें एयर गन से मार डाला। दो बंदर गंभीर रूप से घायल हैं। इसमें से एक तो अभी भी गांव के ही पीपल पेड़ पर बैठा है। वह खौफ की वजह से नीचे नहीं उतर रहा। गांव में बंदरों के मारे जाने की खबर के बाद कुछ जागरूक युवाओं ने सोमवार की दोपहर इसकी शिकायत पुलिस और वन विभाग से की।
सात गांव में ले रखा है ठेका, एवेंजर से पहुंचते हैं शिकारी
ग्रामीणों ने बताया कि तीन शिकारी सलटिकरी गांव से महंगी एवेंजर बाइक में पहुंचते हैं। सोमवार की सुबह भी शिकारी गांव आए थे, लेकिन वे सिर्फ गांव का चक्कर लगाकर लौट गए। ग्राम समिति के सदस्यों के मुताबिक शिकारियों ने बंदर भगाने का ऐसा ठेका आसपास के सात गांव में भी ले रखा है। उन्हीं के माध्यम से इसकी जानकारी मिली। इसके बाद समिति ने गांव में भी बंदर भगाने का काम देने का फैसला लिया। इधर अब वन अमला उक्त शिकारियों की पतासाजी में लग गई है। आसपास के गांवों में भी अलर्ट किया है।
बच्चे बोले- घायल हुए बंदरों को लकड़ी से पीटते देखा
गांव में बंदर पकडऩे वाले और बंदूक लेकर घूम रहे तीन लोगों की जानकारी मिलते ही गांव के बच्चे भी जुट गए। रेंगाकठेरा के ऐसे ही बच्चों ने बताया कि तीनों शिकारियों ने पहले बंदरों को दौड़ाकर उन पर बंदूक (एयरगन) से गोली चलाई। दो बंदरों की मौत फायरिंग से हो गई। लेकिन तीन बंदर घायल होकर गिर गए, जिन्हें अपने पास रखे मोटी लकड़ी से पीट-पीटकर मार डाला। जब सभी बंद मर गए तो उन्हें एक बोरी में भरकर गांव से कुछ दूरी पर ले गए। यह भी चर्चा है कि शव को शिकारियों ने अपने कुत्तों को खिला दिया।
युवक ने दिखाई हिम्मत, खुद थाने व वन विभाग पहुंचा
पूरे मामले की शिकायत करने की हिम्मत गांव के ज्ञानेश्वर साहू ने दिखाई। घटना को देखते हुए वह खुद थाने पहुंचा। जहां उसने पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी। ज्ञानेश्वर ने बताया कि बंदरों के मारे जाने की जानकारी मिलते ही उसने इसका विरोध जताया और शिकायत की। ज्ञानेश्वर की शिकायत के बाद ही गांव में पुलिस और वन अमले की टीम पहुंची। इसके अलावा कुुछ हिंदू संगठनों ने भी गांव पहुंचकर विरोध जताया। कहा कि ऐसी घटनाएं बंद हो।
घायल बंदर रेस्क्यू नहीं हो पाए, पेड़ पर चढ़े
एयर से घायल दो बंदर गांव में ही शीतला मंदिर के पास पीपल पेड़ के ऊंचे हिस्से में चढ़ गए हैं। इन्हे रेस्क्यू करने वन अमले की टीम पहुंची थी। घायल बंदर इतने डरे हुए हैं, कि वे नीचे नहीं आ रहे हैं। रेस्क्यू स्क्वॉयड के दिलीप बंजारी ने बताया कि टीम गांव पहुंचेगी।
मामले में इन धाराओं के तहत की जाएगी कार्रवाई
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मामले में वन्य प्राणी वन संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 50, 39, 42 और 52 के तहत कार्रवाई हो सकती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले में अन्य धाराएं भी लगेगी। धाराएं गैर जमानती हैं। मामले में आरोपी जेल जाएंगे।
बंदर भगाने का ठेका देने गांव में तीन बार हुई बैठक
बंदर भगाने के लिए ग्राम समिति ने तीन बार बैठक रखी। इसमें अध्यक्ष भारत वर्मा और उपाध्यक्ष गणेश वर्मा सहित पदाधिकारियों ने पास के ही गांव सलटिकरी के तीन लोगों को ठेका देने की बात कही। बंदर भगाने वाले शिकारियों को 8 हजार रुपए और एयर गन देना तय किया गया। हर घर से प्रति राशन कार्ड के पीछे 100 रुपए लिए।
मामले में जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी
मामले की जांच जारी है। हमारी टीम ने कुछ ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का बयान भी लिया है। बंदरों को मारने वालों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पतासाजी में टीम लगाई गई है।
- रतन लाल जैन, रेंजर