breaking news New

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः वतन की हालत

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः  वतन की हालत

भाजपा की तू-तू

काँग्रेस की मैं-मैं

मची है तू-तू , मैं-मैं


एक प्रवक्ता भों-भों

एक प्रवक्ता खों-खों

मची है भों-भों, खों-खों


भीड़-भड़क्की चें-चें

धूम-धड़क्की पें-पें

मची है चें-चें , पें-पें


ट्वीटर पर हा-हा

वाट्सएप पर ठिल-ठिल

मची है हा-हा, ठिल-ठिल


इक चेनल पर किल-किल

इक चेनल पर पिल-पिल

मची है किल-किल , पिल-पिल


सिर पर बैठा है कौआ

बढ़ते खल-बल का हौआ

तन है छिल-छिल

जन-मन बिल-बिल


अक्षर बिखरे-बिखरे

कण्ठ बे-सुर, बे-सुर

ओ साँचे शब्द

अर्थ भर, सुर भर

अरज कवि की सुन कर