breaking news New

राज्य में प्रतिबंध लेकिन महासमुन्द में रातों रात महानदी घाट से रेत की चोरी

राज्य में प्रतिबंध लेकिन महासमुन्द में रातों रात महानदी घाट से रेत की चोरी

 खनिज अधिकारी जानकर भी अनजान हैं, कार्रवाई नहीं  

महासमुन्द, 13 सितम्बर। पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में रेत उत्खनन को लेकर 18 अक्टूबर तक रोक है लेकिन महामसुन्द में इस नियम का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। जिला मुख्यालय से चंद किलोमीटर दूर बडग़ांव रेत घाट पर आज रात के अंधेरे में एक पोकलेन मशीन से 40 हाइवा वाहनों में रेत भरने काम होते देख ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे खनिज निरीक्षकों ने महज पांच हाइवा को लेकर कोतवाली में रखा और मामले की इतिश्री कर दी। जिला खनिज अधिकारी मोबाइल पर गैर जिम्मेदाराना राग अलापते हैं कि वे कल से बिलासपुर हाईकोर्ट में हैं और उन्हें घटना की जानकारी नहीं है। इधर रात को जिन रेत भरे 35 हाइवा को घाट पर ही छोड़ दिया गया था, उनका चालक फरार हैं और वाहन अभी भी रेत घाट पर खड़े हैं। सवाल यह उठता है कि रोक के बावजूद, वह भी रात में, बडग़ांव रेत घाट पर भारी तादात में रेत उत्खनन करने के निर्देश किस अधिकारी ने अपने किस ठेकेदार को दिये थे? बडग़ांव घाट पर खड़े हाइवा के मालिक कौन हैं? और उनके चालकों को भागने का मौका खनिज निरीक्षकों ने दिया ही क्यों? 

बीती रात बडग़ांव महानदी घाट पर पोकलेन मशीन से रेत चोरी कर 40 हाइवा में भरा गया। इसकी सूचना ग्रामीणों ने खनिज विभाग को दी। सूचना पाकर खनिज निरीक्षक जितेन्द्र चंद्राकर और अश्विनी झारी घाट पहुंचे। वहां शिकायत सही पाई गई। दोनों ने 40 में से महज 5 हाइवा को कोतवाली महासमुन्द में ला खड़ा किया और बाकी को घाट पर ही छोड़ दिया। इस वक्त जिला खनिज अधिकारी महासमुन्द के बजाय बिलासपुर में हैं औैर उनका दावा है कि उन्हें घटना की जानकारी नहीं है। लिहाजा कार्रवाई नहीं हुई लेकिन घाट पर खड़े 35 हाइवा के चालक एक साथ फरार है। कोतवाली में खड़े हाइवा के चालकों से खनिज विभाद के निरीक्षकों ने अभी तक यह नहीं पूछा है कि किनके आदेश से रातों रात रेत की चाोरी की जा रही है और चोर कौन हैं? और तो और हाइवा किसकी है, यह भी अधिकारियों को नहीं मालूम।  

गौरतलब है कि महासमुन्द में रेत चोरी का यह नया मामला नहीं है। जिला खनिज अधिकारी और जननेताओं की मिलीभगत से हर रात यहां से गुजरने वाली महानदी के गांवों में बने सैकड़ों घाटों पर रातों रात  हाईवा और पोकलन मशीन से रेत की चोरी होती है। अधिकारी घटनास्थल पहुंचकर भी कार्रवाई नहीं करते हैं। इस तरह रेत चोरी का सिलसिला जारी है। इस बार भी पूरी गुंजाईश है कि इस मामले को बातचीत से सुलझा लेने के बाद मामले को शून्य में डाल दिया जाएगा।