किसी भी स्थिति में पढाई का न हो नुक्सान इसलिए तालाबंदी में टेक्नोलॉजी को दोस्त बना लिया

किसी भी स्थिति में पढाई का न हो नुक्सान इसलिए तालाबंदी में टेक्नोलॉजी को दोस्त बना लिया

AKJ-रायपुर : बंदिशें चाहे कितनी भी हों तकनीकी का पूरी तरह से इस्तेमाल करना यदि आपको आता है तो फिर आप चाहे जहां भी फसे हों हर मुशकित बड़ी आसान हो जाती हैं। कोरोना के कर्मवीरों की कहानी के क्रम में आज हम एक ऐसे कर्मवीर की कहानी आप तक पहुंचा रहे हैं जिसने तालाबंदी के दौरान तकनीक का उपयोग करके स्किल के उपयोग का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है जिसे देख कर आप जरूर ये कहेंगे जहां चाह है वहां राह का मिलना निश्चित है।


भविष्य का रिव्यूलेशन है लाइव क्लासेस

टॉपर्स इंस्टीट्यूट हमेशा से ही क़्वालिटी एजुकेशन देने के लिए जाना जाता है। तालाबंदी के दौरान शुरू की गई ऑनलाइन क्लासेस की क़्वालिटी और बेहतर करने के लिए हम ऐसा सिस्टम तैयार कर रहे हैं की बच्चों के सारे प्रश्नों के उत्तर ऑनलाइन मौजूद रहें और हम हर एक छात्र को पढ़ाये जा रहे सब्जेक्ट की ऑनलाइन ही पूरी मॉनिटरिंग कर सकें, इसके साथ ही सारे टीचर्स का पूरा फीडबैक ऑनलाइन मौजूद रहे।


तालाबंदी ने टेक्नोलॉजी को दोस्त बना दिया

तालाबंदी जब हुई तब बच्चों के कोर्स को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित हो गया था, लेकिन तकनीक का सहारा लिया तो सब कुछ सरल हो गया। 41 हो गए तालाबंदी को लेकिन जैसे ही 23 मार्च को पूर्ण तालाबंदी की घोषणा हुई वैसे ही अचानक से सब कुछ एक ही जगह पर रुक गया, रात भर मुझे नींद नहीं आई क्योंकि कुछ बच्चों की परीक्षा चल रही थी और कुछ की परीक्षा होने वाली थी। बच्चे और उनके परिजनों के उस दिन देर रात तक फोन कॉल्स आते रहे। जिसके बाद देर रात तक मेरे कोचिंग के सभी लोग मिल कर इस विषय पर चर्चा करते रहे और आखिरी में ये डिसाइड हुआ की हम ऑनलाइन क्लासेस शुरू करेंगे और अगले हो दिन से हर कोई अपने-अपने सब्जेक्ट के वीडियो बनाकर आपलोग करने लगे। शुरुआत में वीडियो को पूरा नहीं देखते थे बच्चे, बच्चों को पढ़ाने के लिए उनके पीछे पड़ना पड़ता था, इसी लिए लाइव डिजिटल क्लासेस शुरू की, और बच्चों ने भी लाइव क्लासेस अटेंड करने में ज्यादा रूचि दिखाई।


किसी भी स्थिति में पढाई का न हो नुक्सान

तालाबंदी के दौरान देश की अर्थव्यवस्था के साथ ही बच्चों के एजुकेशन का भी काफी नुकसान हुआ है। लॉकडाउन दौरान घर में बैठे बच्चों की पढाई जारी रखने के लिए सरकार ने भी ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है लेकिन जो बच्चे स्कूल के आलावा कोचिंग क्लास जाते थे उनका बड़ा नुकसान हो रहा था। ऐसे में कई संस्थानों ने बच्चों को घर बैठे पढ़ने के लिए ऑनलाइन पढाई की शुरुआत की जिसमें अवन्ति बिहार इलाके में स्थित टॉपर्स इंस्टीट्यूट भी पीछे नहीं रहा। टॉपर्स इंस्टीट्यूट के फाउंडर शुभम चौधरी से कोचिंग क्लासेस में पढाई के बारे वर्त्तमान स्थिति की चर्चा करने पहुंची हमारी टीम। बतादें की टॉपर्स इंस्टीट्यूट में कक्षा छह से लेकर कक्षा 12 तक के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया जाता है साथ ही कई कॉम्पिटेटिव एग्जाम की तैयारी भी करवाई जाती है।


जिसे पढ़ना है ऑनलाइन जुड़े हम फ्री में पढ़ाएंगे

तालाबंदी के दौरान खुद के लिए खूब समय मिला, रामायण-महाभारत देखने के साथ ही कुछ नए सॉफ्टवेयर तैयार किये जो बच्चों के लिए बहुत ज्यादा काम का है। इसमें बच्चे अपने सरे नोट्स अपलोड कर सकते पूरा डाटा रख सकते है। तालाबंदी के दौरान पूरे देश-प्रदेश को आर्थिक तौर पर काफी ज्यादा नुक्सान हुआ है इस लिए हम ऐसी कोशिश कर रहे हैं की हमारी क्लासेस के विडिओ से सभी बच्चे घर बैठे पढाई करें साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोग हमारी ऑनलाइन क्लासेस में जुड़े। क्योंकी हम ये चाहते हैं की जो बच्चे हम तक नहीं पहुंच सकते ये फिर फाइनेंशली कमजोर होने की वजह से कोचिंग क्लासेस अटेंड नहीं कर सकते उनको भी बराबर का एजुकेशन मिले।