कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः मृत्यु का स्वीकार

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः  मृत्यु का स्वीकार


जीती जागती मृत्यु में रह कर

कोई उदाहरण चाहिए जीने का

मृत्यु को स्वीकार किये बिना

नहीं सँवारा जा सकता जीवन


बढ़ता जाता अन्याय

मृत्यु के स्वीकार बिना

जीवन होता निरुपाय

कहाँ होते न्याय के नियम

वह होता अपने आप


अपना-अपना ताप

कौन किसे दे शाप

केवल पश्चाताप


सँवरता जाता है जब शोक

रचा जाता कोई श्लोक

अर्थ पा जाती गहरी आह

निकलती महाकाव्य की राह

जहाँ जीती जागती मृत्यु

उदाहरण बन जाती जीने का


जब जीवन के लिए

कोई अकेला मन रोता है

क्या रह जाता उसका

वह पूरे जीवन का होता है