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तेजस्वी के लिए जातीय गोलबंदी का व्यूह रचना आसान नहीं होगा, इसी फैक्टर के बल पर लालू ने सालों बिहार में राज किया

तेजस्वी के लिए जातीय गोलबंदी का व्यूह रचना आसान नहीं होगा,  इसी फैक्टर के बल पर लालू ने सालों बिहार में राज किया

पटना।   भले ही लालू यादव आज जेल में हो  लेकिन उनका दखल बिहार के चुनाव में साफ देखा जा सकता है।  लेकिन लालू फैक्टर बिहार चुनाव में महागठबंधन की नैया को पार लगा सकता है।

हालांकि उनकी विरासत को तेजस्वी यादव बाखूबी संभाल रहे हैं लालू की सियासत मुस्लिम-यादव गठजोड़ पर टिकी रहती थी। इसी के बल पर लालू ने सालों बिहार में राज किया है। लेकिन लालू के न रहने पर तेजस्वी यादव के लिए जातीय गोलबंदी का व्यूह रचना आसान नहीं होगा।

महागठबंधन में कांग्रेस की क्या भूमिका होगी यह भी बड़ा सवाल है। तेजस्वी यादव के पास अनुभव की कमी है। ऐसे में चुनाव जीतने के लिए महागठबंधन को तीन चीजों का खास ख्याल रखना होगा। उनमें मजबूत सामाजिक समीकरण, नेतृत्व की विश्वसनीयता और संगठन की क्रियाशीलता अहम है। इसी तीन आधार पर चुनावी दंगल को जीता जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जहां तक मुस्लिम वोट बैंक की बात है तो इसको लेकर थोड़ी स्थिति साफ नहीं है। हालांकि तेजस्वी को लोग पसंद करते हैं लेकिन महागठबंधन के आलावा मुस्लिमों का वोट छिटक सकता है, क्योंकि वहां पर दो और गंठबंधन सक्रिय हो गए है। 

अगर कहा जाये तो मुस्लिम-यादव गठजोड़ का सही मायने में किसी ने भुनाया है तो वो केवल लालू यादव है। अगर थोड़ा पीछे जाये तो 1989 में भागलपुर में हिंदू-मुस्लिम दंगा हुआ था। इस दंगे में काफी तादाद में लोगों की जान गई थी।

जिनमें बड़ी संख्या में मुसलमान भी थे। उस समय सत्ता कांग्रेस की थी और मुसलमानों को लगता है कि तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस ने उनके साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया। इतना ही नहीं तत्कालीन कांग्रेसी सीएम सत्येन्द्र नारायण सिन्हा पर सांप्रदायिक तनाव को नियंत्रित नहीं कर पाने का आरोप लगा।

 बिहार में मुस्लिम आबादी 17 प्रतिशत है और उनको एक ऐसे नेता की जरूरत जो उनकी आवाज को बुलंद कर सके और लालू यादव इस भूमिका में बड़े खिलाड़ी साबित हुए। लालू ने यादव वोट बैंक को हासिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

 वहां पर 14 प्रतिशत यादव मतदाता है। ऐसे में लालू ने मुस्लिम-यादव गठजोड़ का ऐसा प्रयोग किया कि अन्य दल देखते रह गए है और लालू ने चुनावी पिच पर शानदार पारी खेली।  बीजेपी के बड़े नेता लालकृष्ण अडवानी ने रथ यात्रा निकाली थी लेकिन बिहार में उसी रथ को लालू ने रोक दिया और मुस्लिम समुदाय में अपनी अलग पहचान बना डाली।