शिवसेना बिहार चुनाव में फिर ‘भूमि पुत्रों’ पर लगाएगी दांव, 100 सीटों पर लड़ेगी चुनाव

शिवसेना बिहार चुनाव में फिर ‘भूमि पुत्रों’ पर लगाएगी दांव, 100 सीटों पर लड़ेगी चुनाव

मुंबई, 30 सितंबर। राष्ट्रीय स्तर पर अपने पैर पैंठ जमाने के लिए अपनी रणनीति के अनुरूप शिवसेना आगामी बिहार चुनाव उसी मुद्दे के साथ लड़ने के लिए तैयारी कर रही है, जिस मुद्दे पर वो कभी बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के लोगों पर टारगेट किया करती थी, जो कि ‘भूमिपुत्र’ का मुद्दा था. लेकिन इस बार वह यह मुद्दा भाजपा और जेडीयू के खिलाफ इस्तेमाल करेगी.

पार्टी की बिहार इकाई ने इस बात को हाईलाइट करने की योजना बनाई है कि जनता दल (यूनाइटेड)-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गठबंधन ने कथित तौर पर अपने गृह राज्य में बिहारियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए बहुत कम काम किया है, क्योंकि उन्हें प्रवासी श्रमिकों की तरह अन्य राज्यों में काम करना पड़ रहा है.

शिवसेना की बिहार इकाई राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से 100 में चुनाव लड़ना चाहती है. हालांकि, पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा है कि इस साल के बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने पर अंतिम निर्णय शिवसेना अध्यक्ष और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ चर्चा करने के बाद लिया जाएगा.

शिवसेना की बिहार इकाई के प्रमुख कौशलेंद्र शर्मा ने दिप्रिंट को बताया, ‘हमारे लोगों को काम की तलाश में मुंबई, दिल्ली और यहां तक कि कन्याकुमारी तक जाना पड़ता है. सरकार यह सुनिश्चित करने में पूरी तरह से विफल रही है कि हमारे राज्य में ही बिहारियों को गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध हैं. भाजपा केवल आत्मनिर्भर बिहार की बात करती है. उन्होंने जमीन पर कुछ नहीं किया है.’

जिस दिन चुनाव आयोग ने बिहार के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा की, शिवसेना की बिहार इकाई ने एक कैप्शन के साथ चुनाव का विवरण ट्वीट किया, ‘भूमी पुत्रों के सम्मान में शिवसेना बिहार मैदान में.’

बिहार चुनाव तीन चरणों में – 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर को होंगे, जबकि परिणाम 10 नवंबर को घोषित किए जाएंगे.

पार्टी की बात करने के लिए एक हेल्पलाइन है, जिसको बिहार इकाई ने अन्य राज्यों में अटके सभी बिहारी प्रवासियों के लिए लॉकडाउन के दौरान स्थापित किया था.

शर्मा ने कहा, ‘हम राशन और लौटने के साधनों के साथ फंसे प्रवासियों की मदद कर रहे थे. हमने महाराष्ट्र के सीएम उद्धवजी ठाकरे से भी अनुरोध किया कि वे बिहार से लौटने वालों के लिए विशेष ट्रेनों की व्यवस्था करें. हम कम से कम 50,000 श्रमिकों की मदद करने में सक्षम थे.