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अगले 25 साल तक महाराष्ट्र में शिवसेना की अगुवाई वाली सरकार रहेगी : संजय राउत

अगले 25 साल तक महाराष्ट्र में शिवसेना की अगुवाई वाली सरकार रहेगी : संजय राउत

मुंबई, 15 नवंबर। महाराष्ट्र में शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा है कि उनकी पार्टी राज्य में अगली सरकार का नेतृत्व करेगी.  उनका यह भी कहना था कि इसके गठन से पहले कांग्रेस और एनसीपीॆ के बीच जिस न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) पर काम किया जा रहा है वह ‘राज्य के हित’ में होगा. संजय राउत ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे नीत भगवा दल केवल पांच साल नहीं बल्कि अगले 25 साल तक महाराष्ट्र में सरकार का नेतृत्व करेगा.

संजय राउत से यह पूछा गया था कि क्या उनका दल तीन दलीय संभावित सरकार में अपने सहयोगियों एनसीपी और कांग्रेस के साथ मुख्यमंत्री पद साझा करेगा या नहीं. इसके जवाब में उन्होंने यह टिप्पणी की. उन्होंने कहा, ‘भले ही किसी एक दल की सरकार हो या गठबंधन हो, सरकार का कोई एजेंडा होना आवश्यक है. सूखा और बेमौसम बारिश (जैसी समस्याओं से निपटना है) और बुनियादी ढांचे संबंधी परियोजनाओं को आगे ले जाया जाना है.’ संजय राउत का आगे कहना था, ‘जो हमारे साथ जुड़ रहे हैं, वे अनुभवी प्रशासक हैं. हमें उनके अनुभव से लाभ होगा.’

अभी तक शिवसेना की राजनीतिक प्रतिद्वंदी रही कांग्रेस के साथ गठबंधन के बारे में राउत ने कहा कि देश के सबसे पुराने दल के नेताओं ने स्वतंत्रता संग्राम के साथ-साथ महाराष्ट्र के विकास में योगदान दिया है. यह पूछे जाने पर कि क्या अगली व्यवस्था में शिवसेना बारी-बारी से मुख्यमंत्री पद साझा करेगी, संजय राउत ने कहा, ‘हम अगले 25 साल के लिए मुख्यमंत्री पद पर बने रहना चाहते हैं. शिवसेना राज्य का नेतृत्व करती रहेगी, भले ही कोई भी इसे रोकने की कोशिश करे.’

संजय राउत से जब एनसीपी और शिवसेना को 14-14 और कांग्रेस को 12 पोर्टफोलियो मिलने अटकलों पर पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘आप सत्ता के बंटवारे की चिंता नहीं करें. (शिवसेना प्रमुख) उद्धव जी निर्णय लेने में सक्षम हैं.’ संजय राउत ने जब पूछा गया कि हिंदुत्व की राजनीति के लिए और कांग्रेस विरोधी के तौर पर जाना जाने वाला उनका दल कांग्रेस जैसे अलग विचारधारा वाले साझीदार के साथ कैसे तालमेल बैठा पाएगा, तो उन्होंने कहा, ‘विचारधारा क्या है? हम राज्य के कल्याण के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर काम कर रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि भाजपा नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत साथ आए दलों के गठबंधन का नेतृत्व किया. उनका कहना था, ‘इससे पहले भी ऐसे उदाहरण रहे हैं जब अलग-अलग विचारधाराओं के दल एक साथ आए.’

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने केंद्र को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उनके तमाम प्रयासों के बावजूद मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में राज्य में स्थिर सरकार का गठन असंभव है. इसके बाद मंगलवार को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था. राज्य में 21 अक्टूबर को 288 सीटों के लिये हुआ विधानसभा चुनाव भाजपा-शिवसेना ने मिलकर लड़ा था और दोनों को क्रमश: 105 और 56 सीटें हासिल हुई थीं. दोनों दलों को मिली सीटें बहुमत के लिये जरूरी 145 के आंकड़े से ज्यादा थी. इसके बावजूद मुख्यमंत्री पद साझा करने की मांग पर दोनों के बीच सहमति नहीं बन पाई जिसके कारण राज्य में गतिरोध बरकरार रहा.(पीटीआई)