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बड़ा खुलासा : 'लाख' रूपये मिलना था ग्रामीणों को, डकार गए अफसर! वन विभाग भानुप्रतापपुर में लाख लगाओ-लाखो कमाओ योजना में जमकर भ्रष्टाचार

बड़ा खुलासा : 'लाख' रूपये मिलना था ग्रामीणों को, डकार गए अफसर! वन विभाग भानुप्रतापपुर में लाख लगाओ-लाखो कमाओ योजना में जमकर भ्रष्टाचार

संजय सोनी

भानुप्रतापपुर. एक तरफ सरकार नक्सल प्रभावित इलाकों में आदिवासियों के कल्याण पर जोर दे रही है तो दूसरी ओर सरकारी अधिकारी अभी भी उनका हक मारने से नही चूक रहे. ताजा मामला वन विभाग भानुप्रतापपुर मण्डल का है जहां लाख लगाओ—लाखो कमाओ' योजना में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है. 16 किलो ग्राम बीज किसानों को मिलना था लेकिन सिर्फ दो किलो ही बांटा गया. प्रतिवर्ष मिलने वाली 340 रूपये राशि भी नही मिली. घटिया बीजों ने भी योजना पर पानी फेर दिया. आश्चर्य कि ग्रामीणों ने इसकी शिकायत की तो आज दो साल बाद भी कोई कार्यवाही नही हुई.

विदित हो कि भानुप्रतापपुर वनमंडल का हिस्सा बने ग्राम कपाली के हितग्राही किसानों ने जानकारी देते हुए बतलाया कि विगत 03 वर्ष पहले जिला यूनियन पूर्व भानुप्रतापपुर के कर्मचारियों द्वारा गुणवत्ताहीन क्वालिटी के कुसमी लाख बीज वितरण किया गया था जिससे लाख हजार तो दूर की बात थी, सौ रुपये का भी लाख नही मिला. इस भ्रष्टाचार के शिकार ग्रामीण शिव लाल गावड़े, रामजी, मंगिया, लालजी, सतवन, श्याम साय, नरसिह, पदुम सिंह एवं विष्णु ने बताया कि ग्राम कपाली में कुसुम झाड़ की संख्या अधिक है. गांव में बहुत लोग लाख का व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. विगत कुछ वर्ष पहले जिला यूनियन पूर्व भानुप्रतापपुर के द्वारा अनुमानित दो.दो किलो का गुणवत्ताहीन कुसुमी लाख बीज को भागा बनाकर वितरण किया गया था लेकिन खराब बीज होने के कारण एक किलो भी लाख का फसल नही हुआ.

करोड़ों की बंदरबांट हुई

करोड़ों का प्रोजेक्ट लाख पालन परियोजना वर्ष 2016.17, 2017.18 एवं 2018.19 की है. जिला यूनियन पूर्व भानुप्रतापपुर के तहत इस योजना में कुल 22 समितियों का चयन किया गया था. इन समितियों के अंतर्गत एक सौ से अधिक समूह बनाये गये थे. प्रत्येक समूह में 10 सदस्य थे. विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार प्रत्येक समूह को 136 किलोग्राम उत्तम किस्म का प्रमाणित कुसुमी लाख बीज वितरण किया जाना था लेकिन अधिकारी व कर्मचारी द्वारा घटिया किस्म का बीज वितरण किया गया। वही कुसुमी बीज का वितरण में भी भारी अनियमितता बरती गईं. 16 किलो ग्राम के स्थान पर दो.दो किलो का भागा बनाकर दिया गया. अच्छे उपज के लिए कुसुम वृक्ष के कटाई छंटाई के लिये प्रति वर्ष प्रति वृक्ष के अनुसार 340 रुपये हितग्राहियों को दिए जाने थे लेकिन राशि नही दिया गया. लाख पालन परियोजना योजना में बीज खरीदी, वितरण एवं कटाई छटाई के नाम पर हितग्राहियों को तो कुछ भी लाभ नही मिला, हां इससे जुड़े अधिकारी व कर्मचारी जरूर लखपति बन गए हैं.

दो साल पहले हुई शिकायत पर कार्रवाई नही
सूत्रों ने बताया कि क्षेत्र का अधिकांश एरिया संवेदनशील अति संवेदनशील होने के साथ ही जंगलों से घिरा हुआ है जिसका भरपूर फायदा अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा उठाया जा रहा है. दो से चार समूहों को दिखाने के लिए अपटूडेट किया जाता है बाकी सब कागजों में तैयार किया जाता है. जांच करने अधिकारी भी नहीं पहुंच पाते. शिकायतकर्ता राजेश रंगारी द्वारा वर्ष 2018 में डीएफओ पूर्व वन मंड़ल भानुप्रतापपुर को आवेदन के माध्यम से लिखित शिकायत की गईं थी लेकिन आज पर्यन्त मामले की जांच नही की गई.