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Exclusive : गोबर बना 'सोना' : आदिवासी-किसानों की कमाई का नया 'बिहान' गोठानों के गोबर से बने उत्पादों ने बढ़ाई कमाई

Exclusive : गोबर बना 'सोना' : आदिवासी-किसानों की कमाई का नया 'बिहान'  गोठानों के गोबर से बने उत्पादों ने बढ़ाई कमाई
  • बिहान योजना का कमाल, गोठानों के गोबर से बने उत्पादों ने बढ़ाई कमाई

    50—60 हजार तक का मुनाफा, माल्स से लेकर बाजार तक में दीए की डिमाण्ड


चमन प्रकाश केयर

रायपुर. जिला पंचायत रायपुर की गोठानों से निकलने वाले गोबर से दीए बनाने की योजना को, मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट नरवा गरुवा घुरुवा बाड़ी की सफलता की एक कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है. साथ ही यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने में मिल का पत्थर साबित हो रही है.

रायपुर जिला पंचायत के द्वारा संचालित बिहान योजना जो ग्रामीण एवं शहरी महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई कार्यक्रम संचालित करती है. इसी के तहत जिला पंचायत सीईओ डॉ. गौरव कुमार पाल के द्वारा गोठानों से निकलने वाली गोबर से दीए बनाने की शुरूआत की गई है. श्री पाल के मुताबिक गोठानों से निकलने वाली गोबर का 95 प्रतिशत प्रयोग पहले चरण में जैविक खाद के रूप में किया गया जो बहुत ही सफल रहा और उसकी मांग काफी आयी. जिसके बाद 5 प्रतिशत गोबर का उपयोग दिए बनाने में किया जा रहा है. दीए और खाद बनाने के लिए गोबर कम पड़ रही है, इसके लिए अन्य गोठानों से गोबर लिया जा रहा है.


राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक विक्रम लोधी ने बताया कि सीईओ के निर्देश के बाद कैसे गोठानो के गोबर का और उपयोग किया जा सकता है, इसके लिए यू ट्यूब, फेसबुक और गूगल में सर्च करने पर स्वानंद गौ विज्ञान अनुसन्धान केंद्र नागपुर का पता चला. उसके बाद प्रदेश के अलग–अलग जिलो के महिला समूह की 80 महिलाओं को अगस्त महीने में दो दिनों के प्रशिक्षण के लिए नागपुर भेजा गया था. इसके बाद इन मास्टर ट्रेनर के द्वारा प्रदेश के 700 महिला समुहों को प्रशिक्षित किया गया जिन्होंने अपने–अपने गोठानो में काम शुरू कर दिया है.

गोबर से बनाये कई उत्पाद
दीए बनाने के लिए सांचा, प्रीमिक्स पाउडर जिसमें उड़द दाल, मेथी, इमली बीज के पावडर और गोंद मिलाकर दीए बनाये जा रहे हैं. गोबर से दिए बनाने की यह नयी तकनीक सबसे पहले आरंग विकासखंड के आदर्श गोठान बनचरौदा में शुरू किया गया. इसके बाद प्रदेश के अन्य जिले बालोद, गरियाबंद, बिलासपुर, कोंडागांव, के गोठान में भी इस पहल को लागू किया गया है. बताया जा रहा है कि बिलासपुर जिले के करीब 50 लोगों की टीम ने आदर्श गोठान बनचरौदा में प्रशिक्षण लेकर अपने जिलों में भी दीए बनाने का काम कर रही है. इसके साथ ही रायपुर जिले के आरंग, तिल्दा, अभनपुर, धरसींवा, विकासखंड के करीब 300 गोठानो के महिला समूहों को तिल्दा विकासखंड के सांकरा में ट्रेनिंग दिया जा रहा है.

बाजारों में मिलने वाली चायनीज के दीए जो काफी महंगे और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हैं, इनके विकल्प के तौर पर गोबर से बने दीए प्रति नग तीन से पांच रुपए में बाजारों में उपलब्ध हैं. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राज्यपाल अनुसुइय्या उईके, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लावा प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास और उनकी पत्नी डॉ. मंजू, रायपुर कलेक्टर डॉ. भारती दासन एस, जिला पंचायत सीईओ डॉ. गौरव पाल और के.वी. कुटीर के नामों की पट्टिका भी बनाई गयी है. गोबर से निर्मित दीए की बिक्री के लिए जिला पंचायत के द्वारा तेलीबांधा मरीन ड्राइव, कलेक्टोरेट, नालंदा परिसर, बीटीआई ग्राउंड में प्रदर्शनी लगाई गयी है

मोबाईल रेडियेशन से बचाएगा गोबर से बने स्टैंड
मोबाईल का उपयोग लोगों की सुविधा के लिए तो है ही, लेकिन उससे निकलने वाली रेडियेशन से कैंसर जैसी घातक बीमारी भी हो जाती है. इसके बचाव के लिए रायपुर जिला पंचायत ने तोड़ निकाल लिया है और गोबर से बने मोबाईल स्टैंड जो एंटी रेडियेशन का काम करता है और इसकी कीमत भी बाजारों की अपेक्षा काफी कम है.

गोबर से बनी गणेश मूर्ति, लक्ष्मी मूर्ति, की रिंग, गणेश और लक्ष्मी की फ्रेम, कार लटकन, हवन कुंड, धुप बत्ती, उबटन, फेसपैक, सहित कई प्रकार की उपयोगी वस्तुओ का निर्माण किया गया है. त्योहारी सीजन को देखते हुए गोबर से बने उत्पादों का गिफ्ट पैक तैयार किया गया है जिसकी कीमत 50 रुपए से 400 रुपए में खरीद सकते हैं. जिला पंचायत सीईओ डॉ. गौरव पाल ने बताया कि गोबर के दीए की पैकिंग को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी अपने निवास में मंगवाया है.

अब होगी ऑनलाइन सेल

गोबर से निर्मित दिये को फ्लिपकार्ट, अमेजन एवं स्नेपडील कम्पनियों से भी करार हो गया है और बहुत ही जल्द इनकी बिक्री भी शुरू हो जाएगी. देश के अन्य राज्यों दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, मध्यप्रदेश के अलावा देश के कई निजी कम्पनी में भी गोबर की दीए की मांग इस कदर बढ़ने लगी है कि महिला समुह के कार्यकर्त्ता इतने बड़ी मात्रा में दिये बना नही पा रहे हैं. जानकारों का मानना है कि गोबर से निर्मित कोई भी वस्तु किसी भी तरह से हानिकारक नही है बल्कि अध्यात्मिक रूप से देखा जाये तो गोबर को पवित्र माना गया है. वहीं गोबर से निर्मित दीए से गाय की रक्षा होगी, साथ ही गाय को लोग आवारा नहीं छोड़ेंगे और उनकी रखरखाव में भी विशेष ध्यान देंग. गोबर बायोडिग्रीडेबल है जो मिटटी में घुल जायेगा और पर्यावरण के लिए लाभदायक है.

50 से 60 हजार तक की सेल : आइएएस अभिजीत सिंह

बिहान' परियोजना के डायरेक्टर, आइएएस अभिजीत सिंह ने बताया कि गौठान योजना के तहत हम किसान से लेकर महिला एनजीओ तक की चिंता कर रहे हैं. गाय के गोबर से बने उत्पाद या आदिवासियों के कला—शिल्प को बाजार दिलाना बड़ी चुनौती थी इसीलिए हमने राजधानी के माल्स, नईदिल्ली के बाजारों को चुना. नतीजन कई जगहों पर ऐसे उत्पाद की बिक्री से 50—60 हजार तक का मुनाफा हो रहा है. स्पष्ट है कि आम आदमी ने ऐसे प्रोडक्ट को हाथोंहाथ लिया है. इससे किसान और आदिवासी दोनों को फायदा होगा. बिहान योजना के अंतर्गत हम और भी प्रोजेक्ट तथा योजनाओं पर काम रहे हैं.