मध्यप्रदेश की डायरी: भोपाल ब्यूरो चीफ प्रणव पारे की कलम से (रहा किनारे बैठ)- मेरी इम्युनिटी सबसे ज्यादा स्ट्रांग

मध्यप्रदेश की डायरी: भोपाल ब्यूरो चीफ प्रणव पारे की कलम से (रहा किनारे बैठ)- मेरी इम्युनिटी सबसे ज्यादा स्ट्रांग



मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मिडिया के सामने स्वीकार कर लिया कि वो मास्क नहीं पहनते हंै, जब यह खबर वायरल हुई तो सफाई में फिर एक उनका बयान आ गया कि उनको सांस लेने में तकलीफ होती है। इधर, बिना मास्क के पकड़े जाने पर मध्यप्रदेश पुलिस 500 रूपये तक का जुर्माना वसूलती है। नरोत्तम मिश्र ने मध्यप्रदेश में लॉकडाउन की घोषणा भी बिना मास्क लगाए ही की थी, जिसकी बहुत चर्चा हुई थी। इस मामले में कांग्रेस पार्टी ने चुटकी ली और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा द्वारा मास्क नहीं पहनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही सवाल दाग दिया कि क्या जनता भी इसी तरह नियम बना और तोड़ सकती है? अभी मध्यप्रदेश में गृह मंत्री ने दुबारा लॉकडाउन नहीं होगा ऐसे संकेत दिए हंै। इधर, प्रदेश में कोविड से संक्रमित मरीज़ों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी दजऱ् की जा रही है। इस लगातार हो रही वृद्धि के कारण मध्यप्रदेश के दोनों बड़े शहर इंदौर और भोपाल में अस्पतालों में भर्ती होने और वेंटिलेटर की उपलब्धता के संकट पर खबरें लगातार मिल रही है। विशषज्ञों की राय के अनुसार, मध्यप्रदेश में बदलते मौसम के कारण कोरोना संक्रमण का खतरा और भी गहरा सकता है।

तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है
प्रदेश भाजपा कार्यालय में मीडिया प्रभारी होना कोई हंसी खेल नहीं है, दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री के एक खास मीडिया ग्रुप की नाराजगी इतनी बढ़ गई कि मीडिया प्रभारी उसका निशाना बन गए और उन पर जबरदस्त निजी हमले हुए। मीडिया प्रभारी पर दबाव डाला गया कि जनसंपर्क से विज्ञापन दिलवाइये। जब बात नहीं बन पाई तो प्रदेश मीडिया प्रभारी का टेंटुआ दबाना शुरू कर दिया गया। इस मीडिया प्रभारी का सरकार पर प्रभाव भी अच्छा खासा है, लेकिन अपेक्षा एकतरफा थी और तकनीकी कारण बहुत सारे थे। फिर चुनावों की व्यस्तताओं के चलते इस मिडिया प्रभारी का सारा समय ग्वालियर पर ही केंद्रित है, तो इस नाराजग़ी का सिला ये हुआ कि प्रभारी के खिलाफ ही खबरों और कथाओं के छपने का सिलसिला शुरू हो गया। फिलहाल, प्रदेश प्रभारी मीडिया पर हुए निजी हमले से प्रदेश अध्यक्ष और संगठन तिलमिलाया हुआ है और मामला बड़े स्तर पर संज्ञान में लिया जा चुका है। अब तीर तो निकल गया है, अब जो भी होगा देखा जाएगा वाली स्थिति है, इस मामले पर चुनाव तक चुप रहने का इरादा दिखाई दे रहा है। फिलहाल प्रदेश मीडिया प्रभारी ग्वालियर चम्बल के उपचुनावो में व्यस्त है।

अब बसपा ने भी अपने दरवाजे खोले
बहन मायावती भी मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी को बख्शने को तैयार नहीं है, कांग्रेस पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री और पीसीसी के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले महेंद्र बौद्ध को मंगलवार को पार्टी से इसलिए निष्कासित कर दिया कि बौद्ध ने मंगलवार को बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ले ली। बौद्ध ग्वालियर अंचल में उपचुनाव के लिए घोषित प्रत्याशियों की सूची को लेकर नाराज चल रहे थे। वे भांडेर से चुनाव लडऩे के इच्छुक थे, लेकिन पार्टी ने बसपा के पूर्व नेता और बहुजन संघर्ष दल से कांग्रेस में आए फूलसिंह बरैया को उम्मीदवार घोषित कर दिया था। इस कांग्रेस विधायक के निधन के बाद मध्यप्रदेश में अब 27 नहीं 28 सीटों पर होगा उपचुनाव। बौद्ध का कहना था कि अनुसूचित जाति की सीटों के प्रत्याशी चयन में अनुसूचित जाति विभाग या उसके पदाधिकारियों से कोई राय-मशविरा नहीं लिया गया। इससे पहले उन्होंने प्रदेश नेतृत्व पर अनुसूचित जाति विभाग के नेताओं और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाया था। महेंद्र बौद्ध ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष को पद से इस्तीफे के लिए भेजे गए पत्र में आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी तरफ से जब बात रखी तो उसे भी अनदेखा किया गया। इस मोड़ से भाजपा की राह आसान होती नजऱ आ रही है। भाजपा से संभावित प्रत्याशी संतराम सिरोनिया के लिए ये खबर अच्छी है। बताया जा रहा है कि महेंद्र बौद्ध भांडेर विधानसभा सीट से फूल सिंह बरैया को टिकट दिए जाने के पार्टी के फैसले से नाराज चल रहे थे। महेंद्र बौद्ध का बसपा में चले जाने से बाकी सीटों पर भी असर पडऩा तय मन जा रहा है।

कही उल्टा ना पड़ जाए ये दांव
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का ऐसा मानना है कि जितनी देर में पत्रकारों से मिलूंगा, उनको इंटरव्यू दूंगा उतनी देर में तो उपचुनावों की कम से काम दो सीटों पर जनता से सीधे संवाद कर लूंगा। ये बात उनको बहुत देर बाद समझ आई, खैर जो भी हो उनकी दूर की कौडिय़ा भी अपने आप में अनोखी ही होती है। सुना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के परम मित्र सचिन पायलेट को चम्बल के गूजर बहुल सीटों पर प्रचार के लिए बुलाया जा सकता है। विश्वस्त सूत्र भी इसकी पुष्टि कर रहे हैं ये भाजपा के रणनीतिकारों के लिए एकदम नया तीर है, लेकिन कमल नाथ के लिए हो सकता है उड़ता तीर साबित हो जाए। क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलेट की दोस्ती में एक सिक्का ऐसा भी है, जिसके दोनों तरफ हेड ही है, टेल नहीं है। अन्दर खाने से जो खबर आ रही है उसके अनुसार 360 डिग्री की इस दोस्ती में एक भी डिग्री कमलनाथ के लिए होगी इसमें संदेह है।

गोविन्द तो गयो काम से
सागर सुर्खी क्षेत्र की भाजपा कद्दावर नेता पारुल साहू का भाजपा छोडऩा और कांग्रेस में चले जाने का असर सुर्खी विधानसभा के भाजपा कार्यकर्ताओं पर पडऩा निश्चित माना जा रहा है। अंदरखाने की खबर है कि कांग्रेस छोड़ भाजपा में आये गोविन्द राजपूत को अब ये सीट निकालना बहुत मुश्किल पडऩे वाला है। क्योंकि पारुल साहू की इस क्षेत्र में जो पकड़ और छवि है उसका तोड़ नहीं है। वैसे भी भाजपा के एक दद्दाजी ने ठहाका लगते हुए बताया कि 'भजपा वालन को का है गोविन्द हार गाओ तो फिर दीदी के पेअर पूज लेहें वा में कौन सी बड़ी बात हेगीÓ दादा की बात में दम है, आगे हरि इच्छा।