प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-कोरोना की लूट है, लूट सके तो लूट

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-कोरोना की लूट है, लूट सके तो लूट


धनिया की क्या औकात कि वो सौ रूपये पाव बिके। टमाटर 100 रूपये किलो, आलू 70 रूपये किलो ऐसे ही बाकी को भी आपदा में अवसर मिला। कोरोना की रफ्तार यही रही तो आने वाले दिनों में ये सारी चीजें इससे ज्यादा महंगी बिकेगी और सबसे महंगे होंगे कोरोना के नाम पर चल रहे कोविड अस्पताल। प्राणवायु आक्सीजन आपके प्राण ले लेगी। जिसे मौका मिलेगा वो आपको लूट लेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दी गई समझाईश के बाद लोगों को समझ में आ गया था कि जान है तो जहान है। कुछ ने जान को महत्व दिया, कुछ ने जहान को। अभाव, संकट और महामारी के साथ एक ओर जहां समाज का तबका लोगों की मदद के लिए आया तो वहीं कुछ लोग ने प्रधानमंत्री की ही दूसरी बात आपदा को अवसर में बदलने का काम किया। शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक उपभोग की वस्तुओं के क्षेत्र में जो लूटमार मची, उसने लोगों को कोरोना वायरस से भी ज्यादा डराया। संभावित कमी या लॉकडाउन की अनिश्चितता के चलते लोगों ने अपने पास ऐसी-ऐसी चीजों का ज्यादा से ज्यादा महंगे दामों पर भी खरीदकर संग्रहण किया, जिन्हे आसानी से मिल जाना चाहिए। बहुत से मुनाफाखोर अस्पतालों, स्कूलों और व्यापारियों ने मौके का फायदा उठाकर लोगों को लूटने कोई कसर नहीं छोड़ी। अपने प्रशासनिक व्यय और रोजमर्रा के खर्चों को जोड़कर, थोड़ा मुनाफा लेकर भी ये लोगों से पैसे वसूले तो किसी को देने में कोई गुरेज नहीं होगा परंतु कोरोना संकट के समय ये लोग कोरोना की लूट है, लूट सके तो लूट का मूलमंत्र अपनाकर लोगों का भयादोहन करके उनकी मजबूरी का फायदा उठाते रहे हैं। प्रायवेट हास्पिटल और प्रायवेट डॉक्टर बहुत बार गांव-गांव से लेकर शहर तक में अपने कमीशन एजेंट वैसे ही रखते हैं, जैसे होटल व्यवसाय वाले ऑटो, टैक्सी, रिक्शा वालों को कमीशन एजेंट के रुप में रखते हैं। बहुत से सरकारी दफ्तरों में भी एजेंट परपंरा संचालित है। सरकार द्वारा बनाई गई तमाम व्यवस्थाओं को अंगूठा दिखाकर इनके लिए बहुत से क्लस्टर इंचार्ज एजेंट का काम करके उनके पास जाने वाले कोरोना संक्रमितों को सरकारी अस्पतालों में बेड उपलब्ध देने के बावजूद प्रायवेट अस्पतालों में भेज रहे हैं। सरकार की साइट है www. Hospital.cgcovid19.in  जिसमें बेड की उपलब्धता दर्शायी जाती है किन्तु क्लास्टर इंचार्ज और बहुत सी सरकारी एजेंसी से जुड़े लोग कमीशनखोरी के चक्कर में प्रायवेट हास्पिटल का ही रास्ता दिखाते हैं। सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन की दरों से कई गुना ज्यादा दर पर ये अस्पताल वेंटिलेटर से लेकर बाकी सुविधाएं दे रहे हैं। शासन के आदेश के अनुसार, एपिडेमिक डिसीज एक्ट 1897, छत्तीसगढ़ पब्लिक एक्ट 1949 तथा छत्तीसगढ़ एपिडेमिक डिसीज कोविड 19 रेगुलेशन एक्ट 2020 के तहत कार्यवाही करने कहा गया है। आवश्यकता पडऩे पर उस चिकित्सालय को कोविड-19 के इलाज के लिए प्रदान की गई अनुमति निरस्त करने की भी बात है परन्तु मुनाफाखोरों के हौसले हमेशा शासन आदेश से ज्यादा बुलंद होते हैं।

कोरोना संक्रमण की चैन को तोडऩे लगाए गये लॉकडाउन की सूचना के साथ ही बाजार में सब्जी-भाजी सहित जरूरी सामग्री कई गुना दामों पर बिकी। लोग भरी बरसात में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते हुए भीड़ के रूप में सामान खरीदते दिखे। ये लोग सामान के साथ अपने घर कोरोना वायरस ले गये हो तो कोई आश्चर्य नहीं। यदि सही में कोरोना जांच का दायरा बढ़ा तो पता चलेगा कि ये लॉकडाउन कितना कारगर रहा। देश ने पिछले छह महीनों में इस तरह के लॉकडाउन को थाली, ताली और दीये की रोशनी में बढ़ते हुए देखा है।

कोरोना के बचाव के लिए जागरूकता और आत्मचिंतन के संदेश जरुरतों के सामने बेमानी सिद्ध हो रहे हैं। कोरोना को लेकर रोज-रोज आने वाली खबरें भी आपके और लोगों का मनोबल तोडऩे वाली है। ये अच्छी बात है कि बिना किसी वैक्सीन के आए अभी तक  देशभर में 82 प्रतिशत स्वास्थ्य दर है। वैक्सीन ट्रायल के तीसरे चरण में होने के बावजूद कोई यह कहने की स्थिति में नहीं है कि वैक्सीन कब तक मिल पाएगी?

कोरोना के चलते जहां एक ओर लोग अपने रोजगार-धंधे, नौकरी से हाथ धो रहे हैं, वहीं कोरोना से मरने वाले व्यक्ति और परिवार से मारे डर के ऐसी दूरी बरती जा रही है, जो चौंकाने वाली है। यही वजह है कि लोग कोरोना की जांच से बच रहे हैं। ऑनलाइन क्लासेस से ऊबे बच्चे घर में बैठे-बैठे जिद्दी और चिड़चिड़े हो रहे हैं। गैजेट और टीवी के अत्यधिक उपयोग से नेटवर्क की कनेक्टिविटी कमजोर हो गई है। बैंक के एजेंट ईएमआई के लिए लोगों को फोन कर रहे हैं। स्टेशन में यात्रियों की लंबी कतारें, सड़कों पर गाडिय़ों की लंबी कतारें, बैंक, एटीएम में भी लंबी कतारें बताती हैं कि लोगों की जरूरतें, सरकारी समझाईश से ज्यादा जरूरी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, एक सप्ताह में 20 लाख नये संक्रमित बढ़े हैं। यह 6 प्रतिशत की वृद्धि है। बढ़ते कोरोना संक्रमण और मौतों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और पंजाब की स्थिति की समीक्षा की। पूरे देश का 64 प्रतिशत एक्टिव केस इन्ही राज्यों में है। देश में कोरोना वायरस (कोविड-19) संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी से संक्रमितों की संख्या अब 56 लाख से अधिक हो गयी है। विश्वभर में कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी से अब तक लगभग 9.69 लाख लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 3.15 करोड़ लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। अमेरिका की जॉनहॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केन्द्र (सीएसएसई) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, कोरोना से विश्वभर में अब तक 3,14,80,193 लोग संक्रमित हुए हैं और 9,68,683 लोगों की मौत हुई है।
छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। रायपुर शहर में 26 हजार से अधिक मामले हैं। वहीं प्रतिदिन नौ सौ से हजार मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना वायरस की रोकथाम और इसकी श्रृंखला को तोडऩे के लिए संपूर्ण रायपुर जिले को कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है।

छत्तीसगढ़ में बेकाबू होते कोरोना वायरस से निपटने के लिए कई जिलों में नगरीय निकायों को कंटेनमेंट जोन घोषित कर टोटल लॉकडाउन की शुरुआत हो चुकी है। रायपुर-दुर्ग में टोटल लॉकडाउन, वहीं बिलासपुर संभाग के छह में से पांच जिलों और सरगुजा संभाग के पांच में से चार जिलों के नगरीय निकायों को कंटेनमेंट जोन घोषित कर लॉकडाउन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

कोरोना वायरस के चलते अस्पतालों के ब्लड बैंक में रक्त की कमी हो गई है और इस कमी के चलते मरीजों के परिजनों को रक्त के लिए भटकना पड़ रहा है। वहीं बिचौलियों से महंगे दामों पर रक्त लेना पड़ रहा है। सिम्स व जिला अस्पताल में जिस एक यूनिट ब्लड के लिए परिजनों को 200 रुपए चुकाना पड़ता था, अब रक्त की कमी के चलते निजी ब्लड बैक में उसके बदले 1450 से 1600 तक के भुगतान करने पड़ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमितों के साथ-साथ मौत के मामले बढ़ गए हैं। मंगलवार को कोरोना से 28 लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही अब तक प्रदेश में मौत का आंकड़ा बढ़कर 718 हो चुका है। प्रदेश में मंगलवार को 2736 नए कोरोना मरीजों की पहचान हुई है। अब प्रदेश में संक्रमितों की संख्या 90,917 पहुँच गई है।

यदि लोग खुद की सतर्कता, इम्युनिटी और अन्य कारणों से बच भी रहे हैं तो उन्हे कोरोना के नाम पर हो रही लूट और हालात जीने लायक नहीं छोड़ेंगे। यह आंकड़ा भविष्य में बढ़ भी सकता है। जब लोग कह रहे हों कि झाडू लगाने से भी कोरोना फैल सकता है तब तो मानो अभी बहुत सी गर्द उडऩा बाकी है। अभी कोरोना का पिक पीरियड आना बाकी है। पता नहीं शासन की तमाम निगरानी, निर्देशों और कड़ी चेतावनी के बावजूद कोरोना के नाम पर अभी कितनी लूट होना बाकी है।

जड़े फ्रेम भीतर टंगे हुए हैं ब्रम्हचर के कड़े नियम
इसी फ्रेम के पीछे चिडिय़ा गर्भवती हो जाती है।