Bandish Bandits: एक अच्छा अच्छा एहसास है

Bandish Bandits: एक अच्छा अच्छा एहसास है

पुंज प्रकाश 

बंदिश बैंडिट्स की हर तरफ तारीफ पढ़ने-सुनने को मिल रही है, जो उचित भी है क्योंकि भारतीय शास्त्रीय संगीत के महत्व और तैयारी को गंभीरता से रेखांकित करता यह हिंदी की पहली वेबसिरिज़ है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि संगीतकार शंकर-एहसान-लय ने शानदार काम भी किया है। इस सीरीज में बहुत सारी बंदिशें ऐसी हैं जो ज़माने तक बार-बार सुनी और याद रखी जाएगी लेकिन इस फुस्स पटाखा युग में विश्वास के साथ कुछ नहीं कहा जा सकता है। वैसे यह धुनें शास्त्रीय और फ़्यूजन दोनों ही हैं। जहां तक अभिनय का सवाल है तो नसीरुद्दीन शाह चरम पर हैं। अन्य भूमिकाओं में अतुल कुलकर्णी, राजेश तैलंग, कुणाल राय कपूर, शीबा चड्ढा, राहुल कुमार, अमित मिस्त्री, ऋतुराज सिंह और मेघना मलिक का काम भी बढ़िया है, बाक़ी कुछ औसत का भी है। लेखन भी कमाल का है, कुछ संवाद और स्थितियां तो इतनी शानदार हैं कि मन से अपनेआप वाह निकल जाती हैं। जैसे इस संवाद को ही देखिए - जो महसूस न किया हो उसे प्रस्तुत करना ही कलाकार का धर्म है।" या "सुर जितना ज़रूरी है उतना ही ज़रूरी है भाव।" या फिर यह तो कमाल का ही लिखा है - "अनुशासन की कमी को तुम अहंकार से पूरी कर रहे हो।" या फिर ये वाला "रियाज़ जितना मुश्किल हो, गाना उतना आसान हो जाता है।" बढ़िया लेखन के लिए अधीर भट्ट, अमृतपाल सिंह बिंद्रा, लारा चांदनी और ख़ुद निर्देशक आनंद तिवारी का आभार किया जाना चाहिए बाक़ी तो लिखे को अर्थ अभिनेता, निर्देशक, परिकल्पक और संपादक देता है, जो दिया भी गया है।