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सीजेआई गोगोई ने सेवानिवृत्ति से पहले अयोध्या के फैसले को सुनिश्चित करने विदेशी दौरे को रद्द किया

सीजेआई गोगोई ने सेवानिवृत्ति से पहले अयोध्या के फैसले को सुनिश्चित करने विदेशी दौरे को रद्द किया

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई ने इस महीने की बहु-देशीय आधिकारिक विदेश यात्रा को रद्द करने का फैसला किया है. गोगोई ने रिटायर होने से पहले राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में फैसला लिखने के लिए पर्याप्त समय लेने के लिए ऐसा किया है.

सुप्रीम कोर्ट के सूत्रों ने बताया, सीजेआई गोगोई को 18 अक्टूबर को दुबई के लिए उड़ान भरनी थी जिसके बाद उन्हें कैरो, ब्राजील और न्यूयॉर्क में कुछ कार्यक्रमों में शामिल होना था. उन्हें 31 अक्टूबर को भारत लौटना था. नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले महीने उनकी इस यात्रा को मंजूरी दे दी थी.

27 अक्टूबर से 3 नवंबर तक दिवाली की छुट्टी के कारण सुप्रीम कोर्ट बंद रहेगा. हालांकि, मंगलवार को गोगोई के कार्यालय ने मोदी सरकार को यात्रा रद्द करने के बारे में सूचित किया. सूत्रों ने कहा कि इस फैसले के लिए कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है.

सूत्रों ने कहा कि सीजेआई की योजना यह सुनिश्चित करने की है कि अत्यधिक विवादास्पद मामले में फैसला उनकी सेवानिवृत्ति से पहले दिया जाए. गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं.

पिछले महीने मामले की सुनवाई के दौरान गोगोई ने पक्षकारों से आग्रह किया कि वे इस मामले में सुनवाई 18 अक्टूबर तक सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास करें. उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि बेंच ‘जरूरत पड़ने पर सुनवाई पूरी करने के लिए शनिवार को एक घंटे अतिरिक्त बैठने’ के लिए तैयार थी.

इस मामले की सुनवाई करने वाली पांच जजों की बेंच में सीजेआई रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर हैं. इस मामले में  40 दिनों से हर दिन सुनवाई हो रही है, जिसमें स्वतंत्र भारत के सबसे विवादास्पद धार्मिक विवादों में से एक की निपटाने की उम्मीद है.

बेंच इलाहाबाद उच्च न्यायालय की तीन-न्यायाधीश पीठ के 2010 के फैसले के खिलाफ 14 अपीलों का फैसला करेगी. जिसमें फैसला दिया गया था कि अयोध्या में 2.27 एकड़ विवादित भूमि को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच समान रूप से विभाजित किया जाना चाहिए.

सीजेआई गोगोई की अगुवाई वाली बेंच ने अब तक 39 सुनवाई की है, जिसमें गुरुवार को अंतिम फैसला होने की संभावना है. मध्यस्थता से विवाद को हल करने के प्रयास विफल रहे हैं.

हिंदू पक्ष अपने दावे पर अड़े हुए हैं कि भगवान राम के जन्मस्थान पर राम मंदिर को मुगल सम्राट बाबर के शासनकाल के दौरान एक मस्जिद बनाने के लिए ध्वस्त कर दिया गया था और मस्जिद को 1992 में कारसेवकों ने ध्वस्त कर दिया था.

मुस्लिम समूहों का कहना है कि उस स्थान पर मंदिर का कोई प्रमाण नहीं है, जहां अब ध्वस्त बाबरी मस्जिद का ढांचा है. इस मामले में फैसला अगले महीने आने की उम्मीद है. ( दिप्रिंट)