कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः प्रतियोगी

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः प्रतियोगी

हर कोई सफल होने में लगा है

जो सफल नहीं होता उसे भी लगता है

वह सफलता के बहुत करीब है


कोई एक इंच कम दौड़ कर हार जाता है

कोई ज़्यादा दौड़ कर जीत जाता है

कोई किसी से पल-दो-पल आगे है

कोई पीछे


बड़ी कठिन प्रतियोगिता है

सब आगे निकल जाने के लिए

एक-दूसरे का पीछा कर रहे हैं


पता नहीं किसे पीछे छोड़ कर

सब से आगे निकल जाना चाहते हैं

सब-के-सब


थोड़ी देर एक जगह बैठ कर

आगे-पीछे के बारे में सोच क्यों नहीं लेते

शायद ऊपर उठने का कोई मार्ग मिल जाये

जहाँ कोई पीछे नहीं छूटता